देश को कमजोर करने वालों से सख्ती से निपटे सरकारः सरयू राय

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जमशेदपुर:  जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा है कि भारत समृद्ध जरूर हुआ पर जनसंख्या का एक बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा है जो आज भी सामर्थ्यवान नहीं हो पाया है। उस तबके को मुख्यधारा में लाने की कोशिशें हो रही हैं।
यहां बारीडीह में गणतंत्र दिवस समारोह में ध्वजारोहण के बाद सरयू राय ने कहा कि हमारे संविधान में विविधता में एकता की बात की गई है। उनको लागू करने के लिए प्रयास भी हो रहे हैं। अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों को उनके धर्म के अनुसार चलने की आजादी दी गई है। इस आजादी का भी कई मामलों में दुरुपयोग हो रहा है। इसके कारण भारत की एकता-अखंडता पर कई बार खतरा भी पेश आया है। आंतरिक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। सरकारें इन समस्याओं से निपट रही हैं लेकिन ये समस्या बनी हुई है।

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उन्होंने कहा कि देश के कुछ राज्य ऐसे हैं जो आज भी पूरे मन से खुद को भारत के साथ नहीं रखना चाहते हैं। तमिलनाडु जैसे राज्य ने हिंदी को अपने यहां प्रतिबंधित कर दिया। तमिलनाडु पर कार्रवाई करेंगे तो वह अलगाववाद की भावना को और उभारेगा। संविधान में सरकार को यह शक्ति दी गई है कि कोई राज्य इस किस्म की हरकत करे तो केंद्र सरकार उसे भंग कर सकती है। संविधान में लचीलापन और कड़ाई, दोनों भावनाएं हैं। सरकार को उसे लागू करना है। सीमा पर संकट है, उससे ज्यादा संकट देश के भीतर है। 70 के दशक में नक्सलवाद बड़ी चुनौती थी। आज इसका प्रायः खात्मा हो चुका है। ऐसे ही, देश को कमजोर करने वाले तत्वों के खिलाफ भी सरकार को एक्शन लेना चाहिए।

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बिष्टुपुर स्थित अपने कार्यालय/आवास पर ध्वजारोहण के बाद उन्होंने कहा कि कोई कानून अगर संविधान के प्रावधान के अनुकूल नहीं है तो उसे अदालतें निरस्त कर देती हैं। संविधान के भीतर ही यह प्रावधान है कि इसे परिस्थिति के अनुसार बदला जा सकता है। 100 से ज्यादा बार हम लोग संविधान में संशोधन कर चुके हैं। संविधान का जो मूल प्रीय्मबूल है, उसमें परिवर्तन ठीक नहीं। आपातकाल के दौरान उसमें भी परिवर्तन कर समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता शब्द जोड़े गये थे। देश को मूल संविधान, जिसमें ये दोनों शब्द नहीं थे, उसकी भावना से चलना चाहिए। भारत ने इन 76 वर्षों में आर्थिक और सैन्य क्षेत्र में काफी तरक्की की है। देश के सामने कई चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। इन चुनौतियों का हल संविधान के माध्यम से ही निकल सकता है। हमारे संविधान का मूल रुप है अनेकता में एकता की स्थापना। कई राज्य ऐसे हैं जो अनेकता में एकता को मानने को तैयार नहीं हैं। इन पर सख्ती होनी चाहिए।
[3:36 pm, 27/01/2026] Paridhi: .

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