मध्य प्रदेश के अस्पतालो में बनाए जाएंगे ‘गर्भ संस्कार कक्ष’

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Madhya Pradesh: महाभारत के महानायक अर्जुन और सुभद्रा के पुत्र अभिमन्यु ने मां के गर्भ में ही चक्रव्‍यू को कैसे तोड़ा जाए, ये सीख लिया था. कुछ ऐसा ही प्रयोग अब मध्‍य प्रदेश की मोहन यादव सरकार करने जा रही है, जिसे ‘गर्भ संस्‍कार’ नाम दिया गया है. इसके तहत बच्‍चों को मां के गर्भ में ही ऐसे संस्‍कार दिये जाएंगे, जिससे वह एक अच्‍छा इंसान बन सके. ‘गर्भ संस्कार’ को आने वाली पीढ़ियों के सशक्तीकरण का माध्यम करार देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को घोषणा की कि सूबे के सभी विश्वविद्यालयों में ‘गर्भ संस्कार’ की पढ़ाई कराई जाएगी और सरकारी अस्पतालों में ‘गर्भ संस्कार कक्ष’ भी बनाए जाएंगे.मुख्यमंत्री डेली कॉलेज में स्थित गर्भ संस्कार पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि अब मेडिकल फील्ड विशेषकर एलोपैथी के चिकित्सक भी गर्भ संस्कार को सकारात्मक रूप से स्वीकार कर रहे हैं. उन्होंने नॉर्मल डिलीवरी को बढ़ावा देने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया.उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आयुष्मान भारत एवं आयुष मंत्रालय के माध्यम से गर्भ संस्कार को संस्थागत रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है. भविष्य में अस्पतालों के डिज़ाइन में गर्भ संस्कार कक्ष भी शामिल किए जाएंगे. इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन जल्द ही जारी किया जाएगा.मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में परंपरा और विज्ञान हमेशा एक-दूसरे के पूरक रहे हैं. हमारे 16 संस्कार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को स्वस्थ, संतुलित और मूल्यवान बनाने की वैज्ञानिक व्यवस्था है. उन्होंने बताया कि गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास का आधार गर्भ संस्कार है, जो भावी पीढ़ी को संस्कारित और सशक्त बनाने का माध्यम बन सकता है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल प्रदेश को स्वास्थ्य और सांस्कृतिक मूल्यों के नए आयामों की ओर ले जाएगी. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम में डॉ. अनिल कुमार गर्ग एवं सीमा गर्ग द्वारा गर्भ संस्कार पर लिखी गई पुस्तक “शंखनाद दिव्य संतान का” विमोचन भी किया.

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