रांची में चार एमएलए ने निधियों का 60 % खर्च करने की सिफारिश की, जबकि तीन ने अभी तक खाता ही नहीं खोला


झारखंड: झारखंड की राजधानी में उत्सर्जन एवं विकास निधियों के उपयोग के संबंध में हाल ही में हुई समीक्षा में यह रिपोर्ट सामने आई है कि चार सदस्य विधानसभा (एमएलए) ने अपने-आप हिसाब-किताब दिखाते हुए लगभग 60 % तक निधि खर्च करने की सिफारिश की है, जबकि तीन अन्य एमएलए ने अभी तक अपना बैंक खाता खुलवा ही नहीं पाया है।

वित्त विभाग के शासकीय स्रोतों के मुताबिक इस वर्ष प्रत्येक विधायक को विकास कार्य के लिए ₹75 लाख की राशि जारी की गई थी। चार विधायक-समूह ने पहले चरण में लगभग ₹45 लाख की राशि खर्च करने योग्य कार्यों की पहचान की और रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके विपरीत तीसरे समूह में आए तीन विधायक ने संसाधन खाते को खोलने रिश्ते की औपचारिकता पूरी नहीं की, जिससे उनकी निधि अभी फंसी हुई है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की खिसकनी कार्रवाई विधायक-निधि की पारदर्शिता व जवाबदेही पर नए प्रश्न खड़े करती है। सरकारी अधिकारी इस मसले पर कहते हैं कि खाते-खोलना व खर्च-रिपोर्टिंग दोनों ही अनिवार्य हैं, तभी तकनीकी रूप से कार्य आरंभ हो सकते हैं।
इस रिपोर्ट को देखते हुए वित्त विभाग ने एमएलए निधि के खर्च के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी करने का निर्णय लिया है। इसमें आगामी तिमाही में शासकीय निरीक्षण टीम द्वारा खाते खुलने-वाले दिखावे वाले कार्यों के सत्यापन तथा निष्पादन रिपोर्ट की समीक्षा शामिल होगी।
स्थानीय नागरिकों ने इस खबर को सकारात्मक संकेत माना है क्योंकि ऐसा लगता है कि सार्वजनिक निधियों के उपयोग पर अब ध्यान बढ़ा है। वहीं शिकायतकर्ता समूहों ने कहा है कि लेखा-जोखा जल्द सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि “हर रुपया नजर रह सके”।



