कोविड जाँच की बदइंतजामी पर पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार ने व्यक्त की नाराजगी

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● जिला प्रशासन को भाजपा की नसीहत, 48 घन्टो में यदि रिपोर्ट नहीं दे सकतें तो जांच के नाम पर दिखावा करना बंद हो।

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जमशेदपुर:- जमशेदपुर में सरकारी अस्थाई कोविड जाँच केंद्रों पर जाँचे गये नमूनों के रिपोर्ट में देरी और गड़बड़ी पर भारतीय जनता पार्टी ने विरोध जताया है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार ने इस आशय में बदइंतजामी का ठीकरा राज्य सरकार और स्वास्थ्य मंत्री के माथे पर फोड़ा है। कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में कोविड जाँच में लापरवाही और शिथिलता बरती जा रही है। जाँचें गये नमूने के रिजल्ट आने में 15 दिनों से अधिक समय लगाये जा रहे हैं,दिनेश कुमार ने बताया कि वे स्वयं जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे जांच अभियान के तहत साकची गोलचक्कर पर 6 मई को RTPCR जांच करवाये लेकिन आज तक रिपोर्ट नही मिला तो कई मामलों में देरी के दुष्परिणाम देखने को मिली है। दिनेश कुमार ने बिरसानगर निवासी जन्मेजय ठाकुर के मामले को उठाते हुए सरकार और जिला प्रशासन के कोविड जाँच केंद्रों की कार्यसंस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े किए है। दिनेश कुमार ने बताया कि जन्मेजय ठाकुर ने कोविड के लक्षण महसूस करने पर स्वयं ही सरकारी कोविड जाँच केंद्र पर जाकर 29 अप्रैल को कोरोना जाँच करवाया। काफ़ी दिन बीतने पर भी उन्हें रिपोर्ट नहीं मिला। इस बीच तबियत अधिक बिगड़ने पर वे टाटा मुख्य अस्पताल में भर्ती हो गये। अस्पताल के द्वारा हुए ट्रुनेट जाँच में 5 मई को उन्हें कोविड पॉजिटिव पाया गया और टीएमएच में इलाज शुरू हो गया और वे अभी तक अपना इलाज करवा रहे है,14 मई को जन्मेजय ठाकुर के मोबाइल पर मैसेज आया कि वे कोविड निगेटिव हैं। यह मैसेज 29 अप्रैल को कराई गई कोविड जाँच के आलोक में था। इसे घोर लापरवाही और बदइंतजामी की पराकाष्ठा बताते हुए पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने राज्य सरकार से ऐसे मामलों में छतिपूर्ति देने की माँग की है। कहा कि सरकारी केंद्रों पर व्याप्त शिथिलता के कारण मरीजों को देर से जानकारी मिल रही है, परिणामस्वरूप मरीज गंभीर रूप से बीमार पड़ रहे हैं। वहीं कई मामलों में तो देरी के कारण मृत्यु तक भी हो रही है। ऐसे मामलों को अक्षम्य बताते हुए भाजपा नेता दिनेश कुमार ने सख्त नियम बनाने की माँग की है ताकि जाँच केंद्रों की जवाबदेही तय हो सके। कहा कि यदि 48 घँटों की समयावधि के अंदर जाँच रिपोर्ट नहीं दी जा सकती तो ऐसे जाँच केंद्रों के नाम पर दिखावा करना बंद होना ही हितकर होगा।

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