2016 शिक्षक नियुक्ति विवाद में अंतिम मौका, तीन सप्ताह में देना होगा दावा; 12 सितंबर को अगली सुनवाई






रांची : झारखंड की स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा 2016 में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रहे वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने प्रार्थियों को अपना व्यक्तिगत दावा प्रस्तुत करने के लिए तीन सप्ताह का अंतिम अवसर दिया है। कमीशन के अध्यक्ष सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने शनिवार को मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। सुनवाई में दर्जनों प्रार्थियों की ओर से दावे प्रस्तुत किए गए, जबकि कई अधिवक्ताओं ने शेष प्रार्थियों के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। कमीशन ने अनुरोध स्वीकार करते हुए स्पष्ट कर दिया कि तीन सप्ताह की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद कोई नया दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी।


प्रार्थियों को अपने दावा प्रतिवेदन में यह स्पष्ट करना होगा कि वे शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए किस आधार पर पात्र थे। इसके साथ ही अपनी संबंधित कैटेगरी में उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले ऐसे अभ्यर्थियों का विवरण भी देना होगा, जिन्हें चयनित कर नियुक्ति दी गई। दावा प्रस्तुत करते समय संबंधित अभ्यर्थियों के अंक, चयन प्रक्रिया और नियुक्ति से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी, ताकि कमीशन तुलनात्मक आधार पर पूरे मामले की जांच कर सके।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अमृतांश वत्स, शेखर प्रसाद गुप्ता, शुभम मिश्रा और राजेश कुमार समेत अन्य अधिवक्ताओं ने ऑनलाइन माध्यम से प्रार्थियों का पक्ष रखा। अधिवक्ताओं ने कमीशन से कहा कि व्यक्तिगत दावों और आवश्यक दस्तावेजों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय जरूरी है। इसके बाद कमीशन ने तीन सप्ताह की अंतिम मोहलत देने का निर्णय लिया।
यह फैक्ट फाइंडिंग कमीशन झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर गठित किया गया था। हाईकोर्ट ने मीना कुमारी सहित 258 याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान 2016 की शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए वन मैन कमीशन बनाने का निर्देश दिया था। सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को इसका अध्यक्ष बनाया गया। कमीशन के लिए शुरुआत में तीन महीने की अवधि तय की गई थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने अगले तीन महीने के लिए बढ़ा दिया।
अब 12 सितंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले प्रार्थियों को अपने दावे, पात्रता का आधार और तुलनात्मक नियुक्ति से जुड़े तथ्य जमा करने होंगे। इसके बाद कमीशन उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रस्तुत दावों के आधार पर आगे की जांच करेगा।


