ऋण माफी के लिए महाराष्ट्र के नागपुर में किसानों का प्रदर्शन जारी है

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नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर में किसानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है. यहां प्रहार जनशक्ति पार्टी के प्रमुख और पूर्व विधायक ओमप्रकाश कड़ू उर्फ बच्चू कड़ू के नेतृत्व में करीब 15,000 किसानों ने मंगलवार दोपहर से नागपुर में एनएच-44 (वर्धा रोड) पर जोरदार प्रदर्शन करते हुए हाईवे जाम कर दिया. ये किसान कर्जमाफी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.किसानों ने फडणवीस सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो ट्रेनें भी रोकी जाएंगी.महाराष्ट्र सरकार के पूर्व मंत्री और प्रहार जनशक्ति पार्टी के संस्थापक बच्चू कडू मंगलवार रात हजारों किसानों के साथ नागपुर शहर की सीमा पर पहुंचे. वे किसानों की मांगों को लेकर ‘महाएलगार मोर्चा’ निकाल रहे हैं. आंदोलन की अगुवाई करते हुए बच्चू कडू स्वयं ट्रैक्टर चलाकर किसानों के साथ नागपुर पहुंचे.बच्चू कड़ू के साथ आए इन हजारों किसानों ने नागपुर में सभी तरफ के हाइवे पर कल रात से कब्जा कर लिया है. किसानों के इस विरोध प्रदर्शन के चलते हजारों वाहन एनएच-44 पर फंस गए, कई बसें सड़क किनारे खड़ी रहीं. कई यात्रियों को पैदल नागपुर की ओर जाना पड़ा. वहीं बच्चू कड़ू का कहना है कि अगर सरकार किसान कर्ज माफी की उनकी मांग नहीं मानी तो 12 बजे नागपुर के सभी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रोक देंगे. ‘सात बारा कोरा करो’ (हमारा कर्ज साफ करो) के नारों से गूंजते इस आंदोलन का नजारा दिल्ली बॉर्डर पर हुए 2020 के किसान आंदोलन जैसा था.राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बच्चू कडू महाराष्ट्र की राजनीति में अपने आक्रामक तेवर और जनआंदोलनों के लिए जाने जाते हैं. उनका नेतृत्व किसानों के आंदोलनों को मजबूत कर रहा है और सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है.किसानों का आंदोलन राज्य की कृषि नीतियों और चुनावी वादों पर सवाल खड़ा करता है.अगर सरकार ने किसानों की मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो आगामी दिनों में प्रदर्शन और सख्त रूप ले सकता है.बैंकों की रिपोर्ट के अनुसार, 31 दिसंबर, 2024 तक महाराष्ट्र में कुल बकाया कृषि कर्ज करीब ₹2,63,203 करोड़ दर्ज किया गया था. यह कर्ज-भार राज्य के किसान-क्षेत्र के वित्तीय तनाव को दर्शाता है.महाराष्ट्र में 2023 में कुल 2,851 किसानों ने आत्महत्या की.राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में यह संख्या 2,635 रही.2025 की पहली तिमाही (जनवरी–मार्च) में महाराष्ट्र में रिपोर्टेड किसान आत्महत्याओं की संख्या 767 रही.यह संख्याएं राज्य में किसान संकट की पैमाइश के तौर पर देखी जा रही हैं और इन्हें ध्यान में रखकर कई सामाजिक-आर्थिक विश्लेषक कर्जमाफी और राहत पैकेज की मांग उठाते रहे हैं.

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