हर दिन 340 महिलाओं पर हिंसा, न्याय के लिए रसूखदारों से जूझती पीड़िताएँ

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नई दिल्ली : देश में हर रोज करीब 340 महिलाएं और किशोरियाँ निजी या सार्वजनिक जगहों पर शारीरिक, यौन या भावनात्मक शोषण जैसी हिंसा का सामना कर रही हैं, जिससे उनके जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है। महिलाओं के समर्थन के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 2015 में वन स्टॉप सेंटर (सखी केंद्र) योजना शुरू की थी और अब तक 13.37 लाख से अधिक पीड़ितों को चिकित्सा, कानूनी, मनोवैज्ञानिक और आश्रय जैसी सहायता दी जा चुकी है। इतने केंद्रों पर घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, दहेज प्रताड़ना, एसिड अटैक और मानव तस्करी जैसी शिकायतें दर्ज की गईं। हालांकि बहुत सी महिलाएं अब भी अपनी समस्या दर्ज नहीं करातीं।

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वन स्टॉप सेंटरों की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है और 2025 तक देश के 35 राज्यों व केंद्र शासित क्षेत्रों में 926 केंद्र सक्रिय हैं। महिला हेल्पलाइन-181 और ERSS-112 जैसी सेवाओं ने भी लाखों महिलाओं को मदद पहुंचाई है। लेकिन पीड़ितों के परिजन बताते हैं कि न्याय पाना अभी भी मुश्किल है और आरोपी के रसूख के अनुसार सहायता मिलना या ना मिलना तय होता है, खासकर जब आरोपी इलाके में शक्तिशाली होते हैं।

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