चुनाव नज़दीक, नेताजी को याद आई जनता — अनशन भी, आक्रोश भी, और सेल्फी भी !


आदित्यपुर ( व्यंग्य ) – जैसे-जैसे निकाय क्षेत्र में चुनावी माहौल गरमाने लगा है, वैसे-वैसे हार की डर से भयभीत पूर्व पार्षदों को जनता की याद सताने लगी है। आदित्यपुर नगर निगम कार्यालय के सामने शनिवार को अचानक “जनहित की भावना” जाग उठी — लगभग आधा दर्जन पूर्व पार्षद आमरण अनशन पर बैठ गए। वजह बताई गई: टैक्स ज़्यादा, सफाई कम, लंबित विकास योजनाएं, लेकिन असल वजह? जनता के दिल में फिर से जगह बनाना!


शनिवार की सुबह आदित्यपुर नगर निगम परिसर में बड़ी तैयारी थी — बैनर, पोस्टर, चादर, और अनशन वाला पोज़ तैयार। शुरू में सब गंभीर दिखे, “हम तब तक नहीं उठेंगे जब तक मांगे पूरी नहीं होंगी…” जैसी पंक्तियाँ पूरे जोश में गूंज रही थीं।
लेकिन शाम तक ख़ुद डीसी से नेताजी बाते करने लगे, जिसके बाद निगम से ठंडी हवा चली — उपनगर आयुक्त पारुल सिंह नेताजी को मनाने पहुंच गई, क्यूंकि साहेब (जिला उपायुक्त) के आदेश पर !!! फिर कुछ आश्वासन, कुछ फोटो, और कुछ वायरल पोस्ट के बाद आमरण अनशन भी “आमरण” नहीं रह गया, आम-सी शाम में एक ग्लास पानी के साथ खत्म हो गया। पूर्व पार्षदों में नीतू शर्मा, रंजन सिंह, अभिजीत महतो, विक्रम किस्कू, बरजोराम हांसदा, ममता बेज़ और रिंकू राय प्रमुख थे। अब इनकी राजनीति ड्रामा को देख जनता ने कहा — “इनको देखकर तो लगता है, चुनाव अब पास ही है। पिछली बार सफाई नहीं दिखी, जिन योजनाएं की बात नेताजी कर रहे है वो तो वर्षों से लंबित है लेकिन अब ट्रिपल टेस्ट हो चुका है, चुनाव की कभी भी घोषणा हो सकती है। इसलिए जानता मैं हूँ ना………
उधर कुछ सामाजिक संगठनों ने भी मोर्चा संभाल लिया — नैतिक समर्थन के साथ-साथ चेतावनी भी दे डाली, “अगर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज़ होगा।”
(वैसे सूत्रों का कहना है, आंदोलन की ‘तेज़ी’ कैमरे की फ्लैश पर निर्भर करेगी)।
इनके मोर्चा के मोर्चा संभालने वाले फ्रंटलाइन लड़ाको ने भी गंभीरता से कहा — “गंदगी हटनी चाहिए!”
जनता ने धीरे से जोड़ा — “राजनीति की भी।”
दिन में शुरू हुई हाईवोल्टेज ड्रामे का अंत शाम में उस वक्त हो गई जब ख़ुद अनशन पर बैठे नेताओं के चमचो ने जिला उपायुक्त से इनकी वार्ता टेलीफोनिक करवा दी। फिर क्या बिना देर किए निगम के अधिकारियों द्वारा इमली वाला पानी पिलाकर आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा कर दी गई। आमरण अनशन के स्थगित होने का मौका मिलने के बाद सब पूर्व पार्षदगण राहत की सांस ली “ क्यों पता है — इसे हम बताते है।
भैया को डिप्टी मेयर बनाना है।
टेंट भी भैया का, चादर भी भैया का “ भैया को डिप्टी मेयर बनाना है” लेकिन भैया आंदोलन में केवल आर्थिक मददगार थे।खैर पूरे आंदोलन को लेकर जनता ने कहा — “साफ-सफाई की बात तो सही है, लेकिन पहले नीयत साफ़ करिए नेताजी!”



