दिल्ली में विकास बनाम हकीकत: शर्मा एन्क्लेव गंदे पानी में डूबी, सरकार नाकाम

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नई दिल्ली/मुबारकपुर : देश 77 वें गणतंत्र वर्ष में विकास, आधुनिक तकनीक और वैश्विक नेतृत्व की बात कर रहा है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बाहरी इलाके मुबारकपुर की शर्मा एन्क्लेव और शर्मा कॉलोनी की जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट तस्वीर पेश करती है। यहां सैकड़ों घर पिछले सात आठ महीनों से गंदे, बदबूदार और सीवर मिले पानी में डूबे हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि रहना तो दूर, सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।

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हैरानी की बात यह है कि इलाके के आसपास न तो कोई नदी है और न ही लगातार भारी बारिश हुई है। इसके बावजूद गलियों और घरों में पानी भरा हुआ है। नालियों और घरों का सीवर सड़क के बीचोंबीच जमा है, जिससे हर गली बदबूदार जलभराव में बदल चुकी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बिना गमबूट के इन गलियों में चलना संभव नहीं है।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पास की खाली डीडीए जमीन पर लगातार कचरा और मलबा डंप किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि भलस्वा लैंडफिल से लाया गया मलबा यहां फेंका जा रहा है, जिससे जल निकासी के रास्ते संकरे हो गए हैं। नतीजा यह हुआ कि पानी निकलने का रास्ता बंद हो गया और गंदा पानी महीनों से कॉलोनी में जमा है।

स्थिति इतनी भयावह है कि कई घरों में फर्नीचर और जरूरी सामान पानी में सड़ चुका है। कुछ परिवार मजबूरी में ऊपरी मंजिलों पर रहने लगे हैं, जहां भी बदबू और बीमारियों का खतरा बना हुआ है। कई लोग इस हालात से तंग आकर किराए के मकानों में शिफ्ट हो चुके हैं।

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लोगों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन, नगर निगम, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से कई बार शिकायत की। विधायक, पार्षद और एसडीएम तक इलाके का दौरा कर चुके हैं, लेकिन निरीक्षण के बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है।

लगातार गंदे पानी में रहने से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही है और पानी से सांप निकलने का डर हर वक्त लोगों को सताता रहता है। कई परिवारों ने अपनी जेब से पैसे खर्च कर सड़कों पर मलबा भरवाया, ताकि कम से कम चलने की जगह बन सके।

वहीं, दिल्ली सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि जलभराव की स्थायी समस्या के समाधान के लिए बड़े ट्रंक ड्रेन प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के पूरा होने के बाद इलाके को राहत मिलेगी। हालांकि, जमीनी हालात यह सवाल खड़ा करते हैं कि अगर समय रहते जल निकासी की व्यवस्था की गई होती और मलबा डालने से पहले योजना बनाई गई होती, तो सैकड़ों परिवारों को महीनों तक इस बदहाली का सामना नहीं करना पड़ता।

एक ओर चमकती और विकसित दिल्ली की तस्वीर पेश की जा रही है, तो दूसरी ओर वही दिल्ली है जहां लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं और सम्मानजनक जीवन से वंचित हैं। शर्मा एन्क्लेव और शर्मा कॉलोनी की हालत राजधानी में विकास बनाम हकीकत के अंतर को साफ तौर पर उजागर करती है।

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