बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव? राज्यसभा की राह पर नीतीश कुमार, सत्ता में नए चेहरे की चर्चा तेज


नई दिल्ली : बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं। लंबे समय तक राज्य की सत्ता में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्यसभा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। गुरुवार को उनके राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की तैयारी की गई है।

बताया जा रहा है कि नामांकन के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय लोकमोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा भी मौजूद रहेंगे। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति भी संभावित मानी जा रही है, जिससे इस राजनीतिक घटनाक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर भी अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। इसे बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से राज्य की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश कुमार की भूमिका में अब बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
साल 2005 में जब उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री पद संभाला था, तब बिहार राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक चुनौतियों से जूझ रहा था। उस समय उनके नेतृत्व में शासन व्यवस्था और विकास के कई पहलुओं में बदलाव देखने को मिला। इसके बाद कई बार राजनीतिक समीकरण बदले, लेकिन सत्ता के केंद्र में उनका प्रभाव बना रहा।
बीच में वर्ष 2014 में उन्होंने कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री पद छोड़ा और जीतनराम मांझी को जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि बाद में वह फिर से सत्ता में लौट आए और लगातार राजनीति के प्रमुख चेहरे बने रहे।
अब राज्यसभा की ओर उनका कदम राजनीतिक संक्रमण की प्रक्रिया माना जा रहा है। हालांकि तकनीकी रूप से राज्यसभा सदस्य बनने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ना जरूरी नहीं है। लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस पर नैतिक और राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है।
मौजूदा राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल तक है। इसके बाद शपथ की प्रक्रिया पूरी होगी। इसी अवधि के दौरान नए नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। राजनीतिक रणनीति के तहत कुछ समय तक दोनों जिम्मेदारियों के बीच संतुलन भी बनाए रखा जा सकता है।
इसी बीच संभावित उत्तराधिकारी को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जदयू और भाजपा के बीच नए मुख्यमंत्री के नाम पर विचार-विमर्श की खबरें सामने आ रही हैं। दोनों दल अपने-अपने राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बना रहे हैं।
इन चर्चाओं के बीच नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम भी सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि वह जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं। हालांकि किसी भी फैसले के लिए गठबंधन के दोनों प्रमुख दलों की सहमति जरूरी होगी।
गुरुवार को एनडीए विधायकों की बैठक भी बुलाई गई है। इसे आने वाले राजनीतिक फैसलों के लिए अहम माना जा रहा है। इस बैठक से आगे की राजनीतिक दिशा के संकेत मिलने की संभावना है।
राज्यसभा की पांच सीटों के खाली होने से यह चुनाव और भी दिलचस्प हो गया है। माना जा रहा है कि इनमें से दो-दो सीटें भाजपा और जदयू के हिस्से में जा सकती हैं। वहीं पांचवीं सीट के लिए मुकाबला होने की संभावना है, जहां महागठबंधन भी अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर सकता है।
भाजपा की ओर से नितिन नवीन और शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं जदयू की तरफ से नीतीश कुमार और केंद्रीय राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर मैदान में हैं। राष्ट्रीय लोकमोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की दावेदारी भी राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना रही है।



