टीबी के खिलाफ बड़ा अभियान, मेडिकल कॉलेजों को मिला नया जिम्मा



जमशेदपुर : देश से टीबी खत्म करने के अभियान में अब मेडिकल कॉलेजों की भूमिका और बढ़ाई जायेगी. मंगलवार को साकची के एक होटल में आयोजित स्टेट टास्क फोर्स ऑन टीबी की बैठक में स्टेट टीबी पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार ने कहा कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज गंभीर टीबी मरीजों की जांच और इलाज के साथ आसपास के गांवों को गोद लेकर उन्हें टीबी मुक्त बनाने की दिशा में काम करेंगे. उन्होंने बताया कि 24 मार्च से 100 दिवसीय विशेष अभियान चल रहा है. पीजी छात्रों और युवाओं को टीबी रिसर्च के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा. छात्र रिसर्च विषय चुनकर स्टेट टास्क फोर्स को प्रस्ताव देंगे और चयन होने पर पूरा खर्च विभाग उठायेगा. इससे नई दवाओं, संक्रमण के कारणों, ग्रामीण क्षेत्रों में फैलाव और रोकथाम के उपायों पर शोध को बढ़ावा मिलेगा. फिलहाल झारखंड की 4345 पंचायतों में से 455 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित की जा चुकी हैं.

कार्यक्रम का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल, एसीएमओ डॉ. अजय कुमार सिन्हा, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. जोगेश्वर प्रसाद, डब्ल्यूएचओ कंसल्टेंट डॉ. सतीश मांझी और डॉ. मनोज कुमार ने संयुक्त रूप से किया. इसमें झारखंड के सभी 11 मेडिकल कॉलेजों के टीबी एवं चेस्ट विभाग, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया. डॉ. कमलेश कुमार ने बताया कि एमजीएम अस्पताल में एमडीआर टीबी मरीजों के लिए 12 बेड का अलग वार्ड तैयार किया गया है. साथ ही प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक ट्रूनेट और पोर्टेबल एक्सरे मशीन पहुंचायी जा रही है. उन्होंने कहा कि अति कुपोषित और बीसीजी टीका नहीं लेने वाले बच्चों में टीबी का खतरा अधिक रहता है, इसलिए उनकी समय पर पहचान और जांच जरूरी है.
सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कहा कि टीबी गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन समय पर इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि युवाओं की भागीदारी से ही टीबी उन्मूलन जनआंदोलन बन सकेगा. वहीं रिम्स के डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने में सभी मेडिकल कॉलेजों की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है.


