कोडरमा में कभी भी हो सकता हैं, बड़ा हादसा।

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कोडरमा:- झारखंड के कोडरमा जिले में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। जिले में स्‍कूल, अस्‍पताल, व्‍यवसायिक संस्‍थान अग्निशमन विभाग की अनापत्ति के बगैर संचालित हो रहे हैं,जिले के अधिकतर व्यवसायिक प्रतिष्ठान, शिक्षण संस्थान व नर्सिंग होम पूरी तरह से बेफिक्र हैं। यहां फायर सेफ्टी से जुड़े उपकरण नहीं लगाए गए हैं। वहीं संबंधित विभाग भी इस मामले में पूरी तरह से सुस्त हैं। दर्जनों निजी स्कूल, नर्सिंग होम, होटल फायर सेफ़्टी अनापत्ति प्रमाणपत्र के बिना चल रहे हैं। यहां अग्नि सुरक्षा से जुड़े मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। इससे कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। ज्ञात हो कि ज़िले में दर्जनों बड़े होटल बने हैं, पर किसी भी होटल के ऑनर के द्वारा अग्निशमन एनओसी के लिए अप्लाई नहीं किया गया है। नियमों को दरकिनार कर बेधड़क होटल व अन्य प्रतिष्ठान चल रहे हैं। कोडरमा फायर स्टेशन इंचार्ज निर्मल कुमार ने कहा कि नियमानुसार होटल, व्यवसायिक इमारत के मालिक नगर पर्षद कार्यालय से नक्शा पारित करा कर अग्निशमन एनओसी के लिए आनलाइन अप्लाई कर सकते हैं, पर ज़िले में मात्र अभी ही हाल में ही खुला सिटी मॉल, बिग बाजार के द्वारा ही ऑनलाइन अप्लाई किया गया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही वरीय पदाधिकारी के निर्देश प्राप्त कर उक्त प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की जाएगी। इनके अनुसार सभी होटल एवं व्यवसायिक इमारतों के जेनरेटर रूम, बिजली के मेन कनेक्शन बोर्ड और किचेन में अग्निशमन यंत्र लगाना अनिवार्य है।

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एक अग्निशमन वाहन के भरोसे शहर से गांव तक

आगलगी की घटनाओं को लेकर जितना निजी व सार्वजनिक प्रतिष्ठान बेपरवाह है, विभाग से उससे कुछ कम नहीं। कोडरमा ज़िले को सरकार द्वारा दो अग्निशमन वाहन उपलब्ध कराया गया था, पर साल 2018 में झुमरीतिलैया स्थित सुभाष चौक के समीप एक अग्निशमन वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। तीन साल गुज़र जाने बाद भी यह वाहन नहीं बन पाया है। वहीं दूसरा अग्निशमन वाहन 20 वर्ष पुराना है। ज्ञात हो कि कभी कभी दो जगह से फायर कॉल एक साथ आने पर यह मुश्किल हो जाती है कि कहां जाएं। इस संबंध में फायर स्टेशन इंचार्ज के द्वारा ज़िला प्रशासन व वरीय अधिकारियों को सूचना दी गई है पर, इसकी मरम्मत अब तक नहीं हो पाई है। न ही स्थानीय विधायक, सांसद इसके लिए फंड उपलब्ध करा सके है। वैसे आबादी के अनुसार जिले में तीन अग्निशामक वाहन की जरूरत है।

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