पारसनाथ पर अधिकार को लेकर संताल समाज का महासम्मेलन, 4-5 नवंबर को मधुबन में जुटेंगे हजारों आदिवासी

जमशेदपुर : करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान में रविवार को माझी परगना महाल की कोल्हान स्तरीय बैठक जुगसलाई तोरोप परगना दशमत हांसदा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में गिरिडीह के मधुबन में 4 एवं 5 नवंबर को मरांग बुरु बचाओ संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में होने वाले विशाल महासम्मेलन को सफल बनाने पर मंथन किया गया। इस दौरान संताल समुदाय की धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक धरोहर और अधिकारों की रक्षा को लेकर विचार-विमर्श हुआ। परगना दशमत हांसदा ने कहा कि आदिकाल से आदिवासी संताल समाज मरांग बुरु (पारसनाथ चोटी) स्थित जुग जाहेरथान में फाल्गुन महीने के तीसरे दिन बाहा बोंगा और वैशाख पूर्णिमा को विशु सेंदरा पर्व व सामाजिक-धार्मिक सम्मेलन आयोजित करता आ रहा है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न अदालती फैसलों में भी यह स्पष्ट हो चुका है, इसके बावजूद एक अन्य समुदाय द्वारा मालिकाना हक का दावा किया जा रहा है, जिसे उन्होंने अनुचित बताया।

दशमत हांसदा ने कहा कि पारसनाथ मौजा के सभी गांवों में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था संचालित है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों के अस्तित्व, पहचान और धार्मिक धरोहर को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अपने हक और अधिकार को लेकर उलगुलान का आगाज हो चुका है और इसी क्रम में 4 व 5 नवंबर को मधुबन में हजारों आदिवासियों का महाजुटान होगा। बैठक में सलाहकार हरिपोदो मुर्मू, लेदेम किस्कू, सुखराम किस्कू, नवीन मुर्मू, लखन सोरेन, कृष्ण कुमार हांसदा, लखाई हांसदा और सोमनाथ सोरेन सहित कई लोग मौजूद थे।
देश पारानिक दुर्गा चरण मुर्मू ने कहा कि पूर्वजों ने लुगू बुरु घंटा बाड़े दोरबार चटानी में संताल समाज के लिए अलिखित संविधान, रीति-रिवाज, पूजा पद्धति और न्याय प्रणाली की रचना की थी। उन्होंने समाज से पूर्वजों के स्थापित विधि-विधान को व्यावहारिक जीवन में अपनाने और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया। साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक रोजगार और व्यवसाय में भागीदारी सुनिश्चित करने, युवाओं और ग्रामीणों को नशे से दूर रहने तथा समाज के उत्थान के लिए तन, मन और धन से योगदान देने की अपील की।


