SSP साहब… आदेश आपका, खेल किसका? एक हफ्ते बाद भी कथित अवैध कारोबार पर नहीं लगा ब्रेक, साकची से धतकीडीह तक नामों की लंबी फेहरिस्त, साकची कोर्ट के पास भी अवैध कारोबार जोरो पर…GPS लोकेशन वाले फोटो-वीडियो लोक आलोक के पास; संरक्षण की चर्चाओं ने बढ़ाए सवाल, लोक आलोक Exclusive

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जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक डॉ. ऐहतेशाम वकारिब ने जिले की कमान संभालते ही अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। थाना क्षेत्रों में किसी भी तरह के अवैध कारोबार को पनपने नहीं देने का स्पष्ट संदेश दिया गया था। इसके बावजूद लोक आलोक की पिछली रिपोर्ट के एक सप्ताह बाद भी शहर के कई इलाकों से कथित अवैध कारोबार जारी रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि SSP का आदेश थाना स्तर तक पहुंचने के बाद आखिर जमीन पर जाकर कमजोर क्यों पड़ रहा है?

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सूत्रों के अनुसार साकची में कमल पासवान, भालूबासा में दुर्गा यादव, सीतारामडेरा में संतोष पोथाल, राजेश और सुरेंद्र सुंडी, बिष्टुपुर में मो. इरफान और राकेश सोनकर, कदमा में मो. इमरान खान और आकाश, सिदगोड़ा में नर्दराम और पिंटू, बागबेड़ा में रंजीत और संजीत तथा धतकीडीह में मो. इकबाल और मुन्ना समेत कई नाम अवैध कारोबार से जुड़े होने की चर्चा में हैं। लोक आलोक के पास संबंधित स्थानों की GPS लोकेशन के साथ फोटो और वीडियो उपलब्ध है।

इधर, नाम नहीं छापने की शर्त पर एक व्यक्ति ने दावा किया कि “मामला ऊपर तक सेट है।” कुछ स्थानों पर अवैध कारोबार को सत्तापक्ष और विपक्ष से जुड़े कुछ नेताओं का संरक्षण मिलने की चर्चा भी सामने आ रही है।

यदि थाना क्षेत्र में अवैध गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं, तो स्थानीय पुलिस और उसके सूचना तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं है? यदि जानकारी है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? और यदि कार्रवाई हुई है, तो कार्रवाई के बावजूद ऐसी शिकायतें दोबारा क्यों सामने आ रही हैं?

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साकची में सिविल कोर्ट से करीब 100 मीटर की दूरी पर कथित अवैध गतिविधियों की शिकायतें सामने आना भी गंभीर सवाल खड़े करता है। कासीडीह चौक से लेकर शहर के दूसरे इलाकों तक यदि इसी तरह की शिकायतें लगातार मिल रही हैं, तो फिर SSP के सख्त निर्देशों का असर आखिर क्यों नहीं दिख रहा ,यह जांच का विषय है।

लोक आलोक न्यूज की पड़ताल में सामने आई जानकारी और उपलब्ध फोटो-वीडियो के आधार पर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि SSP का आदेश आखिर थाना स्तर पर जाकर किस मोड़ पर रुक जाता है?

एक सप्ताह बीत गया। लेकिन सवाल वही है। शिकायतें फिर सामने हैं। अब शहर की नजर कार्रवाई पर है।

लोक आलोक न्यूज की पड़ताल जारी है। अगले अंक में बताएंगे कि प्रशासनिक तंत्र और कथित सफेदपोश किस तरह अवैध कारोबारियों को संरक्षण देते है।

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