करोड़ों साल पुरानी भू-विरासत पर बड़ा कदम, 36 माह की शोध परियोजना मंजूर

Advertisements

साहिबगंज : राजमहल पहाड़ियों और गंगा नदी प्रणाली की अनूठी भू-विविधता के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए झारखंड सरकार ने ‘जियो-राजमहल’ बहुविषयक शोध परियोजना को मंजूरी दी है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत झारखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद (JCSTI) से स्वीकृत यह परियोजना 36 महीने तक चरणबद्ध तरीके से चलेगी। इसके तहत राजमहल पहाड़ियों, गंगा पारिस्थितिकी, जीवाश्म संपदा, जैव विविधता और पुरातात्विक विरासत का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण किया जाएगा।

Advertisements
https://bashisthaonline.in
Advertisements
Advertisements
https://bashisthaonline.in

परियोजना के प्रधान अन्वेषक आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के अनुप्रयुक्त भूविज्ञान विभाग के प्रो. दीपक कुमार झा हैं, जबकि डॉ. रणजीत कुमार सिंह को सह-प्रधान अन्वेषक बनाया गया है। राजमहल क्षेत्र में लगभग 11.8 करोड़ वर्ष पुराने पादप जीवाश्म मौजूद हैं और यह इलाका भूगर्भीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। शोध के जरिए क्षेत्र की भूगर्भीय, पारिस्थितिक और भू-पुरातात्विक विविधता का व्यवस्थित अध्ययन किया जाएगा, जिससे संरक्षण और भू-पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।

About The Author

See also  सोनारी में 63वां काली पूजा महोत्सव 7 नवंबर से, प्रियंका सूत्रधर और देबांग्शु डे देंगे प्रस्तुति

You may have missed