पुरानी लिथियम-आयन बैटरी अब बनेगी संसाधन, NIT जमशेदपुर के शोधकर्ता ने विकसित की पर्यावरण-अनुकूल तकनीक






जमशेदपुर : NIT जमशेदपुर के एक शोधकर्ता ने इस्तेमाल हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों के रिसाइक्लिंग के लिए पर्यावरण-अनुकूल तकनीक विकसित की है। इस तकनीक का उद्देश्य पुरानी बैटरियों से उपयोगी और महत्वपूर्ण धातुओं को दोबारा प्राप्त करना है, ताकि इलेक्ट्रॉनिक कचरे को कम करने के साथ प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भी घटाया जा सके। इलेक्ट्रिक वाहनों, मोबाइल फोन, लैपटॉप और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में लिथियम-आयन बैटरियों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने के कारण इनके सुरक्षित निस्तारण और रिसाइक्लिंग की जरूरत भी बढ़ रही है।


नई प्रक्रिया में पारंपरिक तरीकों की तुलना में कम हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल और पर्यावरण पर कम प्रभाव डालते हुए बैटरी के उपयोगी तत्वों को वापस हासिल करने पर जोर दिया गया है। शोध का लक्ष्य ऐसी प्रक्रिया तैयार करना है जो बैटरी कचरे से मूल्यवान पदार्थों की रिकवरी के साथ ऊर्जा और संसाधनों की बचत में भी मदद कर सके। इस तरह की तकनीक भविष्य में बैटरी रिसाइक्लिंग को अधिक टिकाऊ बनाने में उपयोगी साबित हो सकती है।
लिथियम-आयन बैटरियों की बढ़ती मांग के बीच इनके कचरे का प्रबंधन बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में NIT जमशेदपुर में विकसित इस शोध को सर्कुलर इकॉनमी और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। तकनीक के बड़े स्तर पर इस्तेमाल से ई-वेस्ट कम करने और बैटरियों में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण कच्चे माल को दोबारा उपयोग में लाने का रास्ता मजबूत हो सकता है।


