3 दिन में 40,763 चालानों में ओवरलोडिंग का खुलासा, 77 हजार टन से ज्यादा अतिरिक्त वजन; 15.49 करोड़ जुर्माने का अनुमान






रांची : झारखंड में खनिज ढुलाई करने वाले वाहनों में बड़े पैमाने पर ओवरलोडिंग का मामला सामने आया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने झारखंड इंटीग्रेटेड माइंस एंड मिनरल मैनेजमेंट सिस्टम (JIMMS) के आंकड़ों का विश्लेषण कर परिवहन विभाग को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है। 10 से 12 अगस्त 2026 के बीच केवल तीन दिनों में 40,763 चालानों में निर्धारित क्षमता से अधिक खनिज पाया गया। इन वाहनों में कुल 77,456.255 मीट्रिक टन अतिरिक्त वजन दर्ज किया गया, जिस पर केवल अतिरिक्त भार के आधार पर करीब 15.49 करोड़ रुपये की पेनाल्टी का अनुमान लगाया गया है।

कंपनीवार आंकड़ों में CCL से जुड़े 19,139 चालानों में सबसे अधिक 56,600.592 मीट्रिक टन अतिरिक्त लोडिंग दर्ज हुई। BCCL के 7,433 चालानों में 7,543.963 मीट्रिक टन, वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के 5,160 चालानों में 5,760.84 मीट्रिक टन, DVC के तुबेद कोल माइंस के 2,150 चालानों में 3,072.47 मीट्रिक टन और NTPC माइनिंग लिमिटेड के 3,261 चालानों में 2,826.35 मीट्रिक टन अतिरिक्त वजन मिला। कुछ वाहनों में तय सीमा से 10 से 15 टन से भी ज्यादा वजन दर्ज किया गया है।
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 194(1) के तहत ओवरलोडिंग पर 20 हजार रुपये के मूल जुर्माने के साथ निर्धारित सीमा से अधिक प्रत्येक टन पर दो हजार रुपये अतिरिक्त पेनाल्टी का प्रावधान है। विभाग के अनुसार 15.49 करोड़ रुपये के अनुमान में प्रति वाहन लगने वाला 20 हजार रुपये का मूल जुर्माना शामिल नहीं है। खान विभाग ने चालानों और वाहनों के सत्यापन, विशेष जांच अभियान, वीइइन-मोशन प्रणाली मजबूत करने और धर्मकांटा के आंकड़ों को रियल टाइम में साझा करने की सिफारिश की है। विभागीय अनुमान के मुताबिक इस तरह की ओवरलोडिंग से सालाना करीब 1,900 करोड़ रुपये तक के नुकसान की आशंका है।


