भारतमाला परियोजना में बवाल, बकाया मजदूरी को लेकर मजदूरों ने HR की पिटाई की

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गुमला : भारतमाला सड़क परियोजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य में मजदूरी भुगतान को लेकर विवाद सोमवार को हिंसक रूप ले बैठा। बकाया वेतन नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों और नाइट गार्डों ने सड़क निर्माण कर रही शिवालया कंस्ट्रक्शन कंपनी के अस्थायी कार्यालय में जमकर हंगामा किया। आक्रोशित मजदूरों ने कंपनी के एचआर अधिकारी का कॉलर पकड़कर उन्हें कार्यालय से बाहर घसीट लिया और मारपीट की। बीच-बचाव करने पहुंचे एक अन्य कर्मचारी के साथ भी हाथापाई हुई। घटना के बाद परियोजना स्थल पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

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महीनों से नहीं मिला मेहनताना, मजदूरों में बढ़ा आक्रोश

ग्रामीणों का आरोप है कि वे लंबे समय से कंपनी के कैंप में नाइट गार्ड के रूप में कार्य कर रहे हैं, लेकिन कई महीनों से उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है। मजदूरों का कहना है कि जब भी वे अपना बकाया मांगने जाते थे, तो एचआर अधिकारी भुगतान का आश्वासन देकर मामला टाल देते थे। सोमवार को जब सभी मजदूर सामूहिक रूप से अपने बकाए की मांग करने पहुंचे, तो कथित रूप से उनके साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की गई। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और विवाद मारपीट तक पहुंच गया।

वहीं कंपनी के एचआर अधिकारी का कहना है कि मुख्य कंपनी से फंड जारी होते ही सभी श्रमिकों के बकाया का भुगतान कर दिया जाएगा।

पहले से विवादों में घिरी है भारतमाला परियोजना

गुमला में भारतमाला परियोजना शुरुआत से ही विभिन्न विवादों का सामना कर रही है। भूमि अधिग्रहण के बदले उचित मुआवजा नहीं मिलने को लेकर कई रैयत लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सड़क के प्रस्तावित एलाइनमेंट में धार्मिक स्थल आने को लेकर भी स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है। इसके अलावा टाना भगत समुदाय अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत है और कई बार जिला प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर चुका है।

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अब मजदूरी भुगतान को लेकर उत्पन्न विवाद ने परियोजना के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।

भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा उग्र

ग्रामीण गंगा सिंह ने बताया कि वे और अन्य मजदूर ‘भूमि सिक्योरिटी मैनेजमेंट कंपनी’ के माध्यम से परियोजना में नाइट गार्ड के रूप में कार्यरत थे। काम पूरा होने के बावजूद उनका मेहनताना नहीं दिया गया है। मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो वे निर्माण कार्य पूरी तरह बंद कर उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन और प्रशासन की होगी।

इन मजदूरों का भुगतान अब तक लंबित

मजदूरों द्वारा जारी सूची के अनुसार कई श्रमिकों का कई दिनों का भुगतान बकाया है। इनमें विराज सिंह (20 दिन), पंकज पांडेय (23 दिन), महादेव महतो (21 दिन), सूरज सिंह (58 दिन), गणेश सिंह (34 दिन), प्रीतम कुमार (28 दिन), गंगा सिंह (54 दिन), रामकुमार गुप्ता (53 दिन), लुईस मिंज (52 दिन) और अमर सिंह (20 दिन) की मजदूरी अब तक नहीं मिली है।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद मजदूरी भुगतान की समस्या का समाधान नहीं किया गया। ऐसे में अब प्रशासन को हस्तक्षेप कर मजदूरों के बकाए का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए ताकि परियोजना में आगे किसी प्रकार का विवाद न हो।

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