ग्रेड रिवीजन में एन एस ग्रेड को अनदेखा किया गया तो चुप नहीं बैठेंगे – राजेश सिंह



टाटा स्टील : टाटा वर्कर्स यूनियन के द्वारा बुलाई गई कमिटी मीटिंग में टाटा स्टील के वेतन समझौते एवं कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कोक प्लांट के तेज तर्रार राजेश कुमार सिंह ने कहा कि सबसे पहले टॉप थ्री को प्रबंधन के साथ हुई वार्ता की पूरी जानकारी हाउस के सामने स्पष्ट रूप से रखनी चाहिए। इसके बाद ही UCM अपनी बात रखेगा, क्योंकि वेतन समझौते से संबंधित अधिकांश मुद्दों को पिछले एक वर्ष से लगातार सभी UCM उठाते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि NS कर्मचारियों के लिए वेतन समझौते में कुछ महत्वपूर्ण एवं गैर-समझौतावादी मांगें हैं, जिन पर किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जाना चाहिए। इन मांगों में DA/Point ₹6, Minimum MGB 30%, Block-wise 3% वार्षिक इंक्रीमेंट तथा 17 महीने के अलाउंस का एरियर शामिल है। राजेश कुमार सिंह ने कहा कि यूनियन एवं विभिन्न पत्रों के माध्यम से यह जानकारी मिल रही है कि प्रबंधन कर्मचारियों की प्रमुख मांगों से सहमत नहीं है। ऐसी स्थिति में NS का वेतन समझौता केवल 3 से 4 वर्षों के लिए ही किया जाना चाहिए । उन्होंने कहा कि कर्मचारी NJCS से इसलिए बाहर हुए थे ताकि समय पर बेहतर एवं 5 वर्षों का वेतन समझौता हो सके, जैसा कि वर्ष 2008 में हुआ था। लेकिन वर्तमान परिस्थिति बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। आज 8.5 वर्ष बीत जाने के बाद भी कर्मचारी वेतन समझौते की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यदि यही स्थिति बनी रहती है, तो हाउस के समर्थन से पुनः NJCS में शामिल होने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने वर्तमान में NS के Block-1 से Block-2 तक के मुद्दे को भी गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल Security, Fire Brigade या Tube Division तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे Tata Steel में कर्मचारियों के सामने यह समस्या बनी हुई है। यदि OS Agreement के अनुसार 8275 कर्मचारियों की संख्या निर्धारित है, तो फिर Block-1 से Block-2 को समाप्त करने का प्रयास क्यों किया जा रहा है? उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि प्रबंधन यूनियन के साथ किए गए समझौते को ही नहीं मान रहा है, तो वर्ष 1956 के समझौते की आज क्या अहमियत रह जाती है?
अंत में उन्होंने कहा कि इन सभी मुद्दों को मजबूती से उठाने की आवश्यकता है। यदि नेतृत्व मजबूत होगा तो UCM भी मजबूत होगा, क्योंकि आज कर्मचारियों की नजर में संगठन की स्थिति काफी कमजोर हो चुकी है। अगर एन एस ग्रेड का बेहतर ग्रेड रिवीजन नही हुआ तो कड़ा रुख अपनाएंगे और चुप बिल्कुल भी नही बैठेंगे ।



