चापड़बाजों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई के बाद मचा बवाल, आदित्यपुर में पुलिस को बदनाम करने की साजिश के आरोप

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आदित्यपुर: आदित्यपुर थाना क्षेत्र में जानलेवा हमले के दो अलग-अलग मामलों में पुलिस द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब मामला चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर पुलिस ने चापड़ से हमला करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा है, वहीं दूसरी ओर कुछ कथित सोशल मीडिया चैनलों एवं पोर्टलों पर पुलिस की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से भ्रामक प्रचार चलाने के आरोप लग रहे हैं।

जानकारी के अनुसार आदित्यपुर थाना कांड संख्या 123/26 दिनांक 11 मई 2026 में पुलिस ने मारूती कुमार, पिता दिनेश सिंह, निवासी चित्रगुप्त नहर, गम्हरिया को गिरफ्तार किया। वहीं थाना कांड संख्या 124/26 में मुकेश दास उर्फ गुट्ठलू, पिता जगदीशचंद्र शेखर दास, निवासी सातवाहनी जमालपुर को गिरफ्तार किया गया। दोनों पर जान से मारने की नीयत से चापड़ से हमला करने का आरोप है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया। छापेमारी अभियान थाना प्रभारी विनोद तिर्की के नेतृत्व में चलाया गया।

इधर गिरफ्तारी के बाद एक महिला द्वारा टाइगर मोबाइल के जवानों एवं पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए। हालांकि पुलिस सूत्रों का कहना है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और उसका संबंध गिरफ्तार आरोपी मुकेश दास से बताया जा रहा है। पुलिस का दावा है कि फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी चल रही थी और इसी दौरान कार्रवाई की गई।

पुलिस महकमे से जुड़े लोगों का कहना है कि कुछ कथित सोशल मीडिया चैनलों एवं पोर्टलों द्वारा पूरे मामले को अलग दिशा देने की कोशिश की गई। सूत्रों के अनुसार आरोपियों को बचाने और पुलिस कार्रवाई को कमजोर करने के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से बयानबाजी करवाई गई। यहां तक कि गिरफ्तार आरोपियों को छुड़वाने के लिए पैरवी का भी प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस के सख्त रुख के बाद पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतें कराई गईं।

बताया जा रहा है कि जिस टाइगर मोबाइल जवान नीतीश पांडे के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्हें आदित्यपुर थाना क्षेत्र में एक सख्त और सक्रिय पुलिसकर्मी के रूप में जाना जाता है। तत्कालीन थाना प्रभारी राजीव कुमार सिंह के कार्यकाल में ब्राउन शुगर कारोबार के खिलाफ चलाए गए अभियान में नीतीश पांडे की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। ब्राउन शुगर तस्करों की गिरफ्तारी और इस काले धंधे के नेटवर्क का खुलासा करने में उनकी सक्रियता की चर्चा पुलिस महकमे में रही है।

पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि वायरल किए जा रहे वीडियो और बयान एकतरफा प्रतीत होते हैं तथा कैमरे के सामने बयान देने से पहले संबंधित लोगों को कथित रूप से प्रभावित किए जाने की आशंका है। मामले को लेकर पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से जांच कर रही है।

फिलहाल क्षेत्र में इस बात की चर्चा तेज है कि अपराधियों पर कार्रवाई के बाद पुलिस को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराध और अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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