महुआडांड़ (लातेहार):एक ओर सरकार गांव-गांव बिजली पहुंचाने और “हर घर रोशनी” का दावा कर रही है, वहीं महुआडांड़ प्रखंड का सुदूरवर्ती उदाल खाड़ गांव आज भी अंधेरे में जिंदगी काटने को मजबूर है। हैरानी की बात यह है कि गांव में करीब 15 वर्ष पहले बिजली के पोल गाड़ दिए गए थे, लेकिन आज तक न तार जुड़ा, n ट्रांसफार्मर लगा और न ही ग्रामीणों के घरों तक बिजली पहुंच पाई। करीब 50 घरों और 250 से अधिक आबादी वाले इस गांव के लोग आज भी लालटेन और ढिबरी के सहारे रात गुजार रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही गांव की समस्याएं फाइलों में दबकर रह जाती हैं।
Advertisements

Advertisements

ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों पहले पोल गाड़े जाने से लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब गांव भी रोशन होगा, लेकिन समय बीतता गया और उम्मीदें टूटती चली गईं। आज हालत यह है कि बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे, मोबाइल चार्ज करने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है और रात में गांव पूरी तरह अंधेरे में डूब जाता है।
ग्रामीणों ने इसे बिजली विभाग और सिस्टम की बड़ी नाकामी बताते हुए कहा कि अगर समय रहते बिजली बहाल नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। मौके पर बिकेश यादव, प्रशांत यादव, रितेश यादव, संदीप यादव, महेंद्र यादव, निरोज यादव, गोविंद यादव समेत दर्जनों ग्रामीणों ने प्रशासन और बिजली विभाग से अविलंब गांव में बिजली आपूर्ति शुरू करने की मांग की।