मनरेगा महिला मेट सुमन शालिनी तिर्की बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा की मिसाल


महुआडांड़ प्रखंड के रामपुर गांव निवासी सुमन शालिनी तिर्की आज संघर्ष, आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई पहचान बन चुकी हैं। मजदूरी कर परिवार चलाने वाली सुमन ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी बेटी की पढ़ाई कभी नहीं रुकने दी। पति कुलदीप लकड़ा के साथ दिन-रात मेहनत कर उन्होंने बेटी को अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय में पढ़ाया और वर्तमान में रांची में बीएससी नर्सिंग की शिक्षा दिला रही हैं।सुमन के जीवन में बदलाव तब आया, जब वे लीड्स संस्था के सहयोग से मनरेगा महिला मेट के रूप में जुड़ीं। जो महिला कभी मोबाइल चलाना नहीं जानती थीं, वही आज मनरेगा मजदूरों का ई-केवाईसी कर ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। अब तक वे लगभग 50 मजदूरों का ई-केवाईसी कर चुकी हैंइसके साथ ही सुमन और उनके पति बकरी पालन एवं बकरा व्यापार से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। उनकी मेहनत से आज गांव की महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं।
राज्य परियोजना समन्वयक रंजीत भेंगरा ने कहा सुमन शालिनी तिर्की जैसी महिलाएं ग्रामीण समाज में बदलाव की नई मिसाल हैं। उनका संघर्ष, आत्मविश्वास और मेहनत दूसरी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देता है। ऐसी महिलाएं समाज और गांव दोनों के विकास की मजबूत कड़ी हैं।”सुमन की कहानी यह साबित करती है कि मेहनत और हौसले के बल पर कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।



