इतिहास रचते हुए पहली LGBTQ+ सांसद बनीं मेनका गुरुस्वामी, राज्यसभा पहुंचीं


नई दिल्ली : सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने इतिहास रचते हुए भारत की पहली LGBTQ+ समुदाय से आने वाली सांसद बनने का गौरव हासिल किया है। उन्हें पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने उम्मीदवार बनाया था और राज्यसभा की 37 सीटों पर 26 अन्य नेताओं के साथ उन्हें निर्विरोध चुन लिया गया।

51 वर्षीय मेनका गुरुस्वामी एक प्रतिष्ठित संवैधानिक वकील हैं, जिन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्कूल और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी जैसे प्रमुख संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है। वह लंबे समय से संविधान और नागरिक अधिकारों की पक्षधर रही हैं। वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसमें समलैंगिक संबंधों को अपराध मानने वाले 158 साल पुराने कानून को समाप्त किया गया था।
टीएमसी के अनुसार, उनका चयन पढ़े-लिखे और संविधान की समझ रखने वाले व्यक्तियों को संसद में भेजने की रणनीति का हिस्सा है। उनके साथ बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार और कोयल मलिक भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। गुरुस्वामी ने कहा कि समानता, भाईचारा और भेदभाव रहित समाज उनके कार्य का आधार रहेगा और वे राज्यसभा में इन मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।



