रामकथा के 5वें दिन राम-लक्ष्मण के गुरु विश्वामित्र संग जाने के प्रसंग पर भाव विह्वल हुए श्रद्धालु

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Saraikela: रामकथा के 5वें दिन रामकथा में प्रवचनकर्ता मंदाकिनी मां ने राम-लक्ष्मण के गुरु विश्वामित्र संग जाने के प्रसंग को सुनाया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव विह्वल हो गए. मां मंदाकिनी ने बताया कि राजा दशरथ अपने प्राण प्रिये पुत्र श्रीराम को गुरु विश्वामित्र संग भेजना नहीं चाहते थे. तब बड़ी मशक्कत के बाद राजा दशरथ भेजने को राजी हुए. गुरु वशिष्ठ ने राजा दशरथ को कहा कि आपके चारों पुत्र महायज्ञ के प्रसाद हैं जिसपर आधा अधिकार हम मुनियों को है इसलिए 2 पुत्र हम ले जाएंगे.
मां मंदाकिनी ने अपने इस प्रसंग में दान के महत्व को भी बताया. बता दें कि इन दिनों हरिओम नगर स्थित कलश रूपी शिव काली मंदिर में 15 जनवरी से रामकथा का आयोजन हो रहा है जिसमें धर्मानुरागी भक्तों की भारी भीड़ लग रही है. इस मंदिर के 15वें स्थापना दिवस पर हर वर्ष 11 दिवसीय रामकथा सह शत चंडी महायज्ञ का आयोजन होता है. इस वर्ष पहली बार यहां महिला कथा वाचक मंदाकिनी मां को आमंत्रित किया गया है. कथा सुनने वालों में सैंकड़ों महिला और पुरुष शामिल हो रहे हैं. यह रामकथा 23 जनवरी तक आयोजित होगा. रामकथा के साथ धार्मिक अनुष्ठान शत चंडी पाठ का आयोजन भी चल रहा है. इस आयोजन को सफ़ल बनाने में श्रद्धालु जय प्रकाश मेहता, समाजसेवी कैलाश पाठक, लक्ष्मी कांत मिश्रा, एस वेणुगोपाल, मनोज आगीवाल, जतन कुमार, अप्पू जी, आर एन प्रसाद, नीतू शर्मा, एसएन मिश्रा, शानू सिंह, मीणा सिंह आदि लगे हुए हैं.

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