जमशेदपुर में 5 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा: गंगा स्नान, संगम-कथा और दीपदान की तैयारी तेज

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जमशेदपुर: जमशेदपुर में 5 नवंबर को मनाए जाने वाले कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर तैयारियाँ पूरी तरह युद्धस्तर पर हैं। इस पवित्र दिन को लेकर प्रशासनिक और सामाजिक दोनों तौर-तरीकों से जागरूकता बढ़ाई जा रही है। प्रदेश में इस दिन गंगा या अन्य पवित्र जल-स्रोत में स्नान करने, दीपदान करने तथा सत्यनारायण कथा का आयोजन करने की पारंपरिक मान्यता है।
स्थानीय धार्मिक संस्थाओं ने कहा है कि कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा-स्नान से पापों का नाश होता है और दीपदान से घर-परिवार में समृद्धि आती है। इस मौके पर शहर के प्रमुख घाटों और धार्मिक स्थलों पर व्यवस्था बढ़ा दी गई है—साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था, सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रकाश-सज्जा का काम भी चल रहा है।
कॉमर्स एवं कल्चर विभाग के अधिकारियों ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे शाम को दीपदान के समय फ्लैमिंग के लिए सुरक्षित जगहें चुनें, जल-प्रवाह में दीए प्रवाहित करें, और सामाजिक दूरी-सहिता का पालन करें।
इसके अलावा, कॉलेज-स्कूलों में धर्म-साहित्यकारों द्वारा कार्तिक माह की कथा-सभा का आयोजन किया गया है, जिसमें बच्चों और युवाओं को यह समझाया जा रहा है कि यह पर्व “विविधता में एकता” और “प्रकृति-संग्रह” का प्रतीक भी है।
धार्मिक––परंपरागत मान्यताओं के दौरान, इस दिन अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्गों के बीच भोजन-दान और वस्त्र-दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। स्थानीय समुदायों में पहले से ही दीप-प्रकाश और कार्यक्रमों की तैयारी देखी जा रही है।
इस तरह, जमशेदपुर में कार्तिक पूर्णिमा सिर्फ एक धार्मिक तिथि नहीं बल्कि समुदाय-आधारित आयोजन और सांस्कृतिक उत्सव की शक्ल ले रहा है—जिसमें श्रद्धा, सजगता और सामाजिक समरसता का मेल दिख रहा है।

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