समान नागरिक संहिता: संविधान का वादा और जमीनी सच्चाई के बीच लंबी बहस

0
Advertisements

नई दिल्ली : समान नागरिक संहिता (UCC) भारत में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। इसका मूल विचार यह है कि शादी, तलाक, गोद लेने और संपत्ति के अधिकार जैसे निजी मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू हो, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। भारतीय संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में शामिल अनुच्छेद 44 में राज्य को देशभर में समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की बात कही गई है।

Advertisements
https://bashisthaonline.in
Advertisements
Advertisements

फिलहाल भारत में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, जिनके आधार पर पारिवारिक और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों का निर्णय होता है। समर्थकों का मानना है कि एक समान कानून से लैंगिक समानता और न्याय सुनिश्चित होगा, जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि इससे धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता पर असर पड़ सकता है।

हाल के वर्षों में इस मुद्दे पर बहस और तेज हुई है। कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर कदम भी उठाए हैं और उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य बना है जिसने समान नागरिक संहिता से जुड़ा कानून लागू किया है। इसके बावजूद पूरे देश में इसे लागू करने को लेकर राजनीतिक, कानूनी और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है।

About The Author

See also  दिल्ली में 70 हजार फैंस के बीच 6 घंटे चला दिलजीत दोसांझ का कॉन्सर्ट, बोले- शो रोकने की हुईं कई कोशिशें

Thanks for your Feedback!

You may have missed