कोरोना काल में हुए बेरोजगार, फिर 5 साल में खड़ा कर दिया ब्रांड,

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रांची:  कोरोना काल में शालिनी लकड़ा और उनके पति दोनों की नौकरी चली गई थी. ऐसे में एक समय तो ऐसा आया जब वे पूरी तरह हताश हो गए लेकिन तब भी हार नहीं मानी. शालिनी बताती हैं कि मुझे केक बनाने का बड़ा शौक था और हसबैंड ने भी होटल मैनेजमेंट कोर्स किया हुआ था और बेकरी में वे काफी एक्सपर्ट थे. तो हमने सोचा कि जो चीज हमें आती है क्यों न इसी को खुद के ब्रांड से लॉन्च किया जाए.शालिनी बताती हैं, शुरुआत में हमने स्नैक्स, बिस्किट वगैरह से शुरुआत की. बिस्किट में कम से कम 20 तरह की वैरायटी, केक में 10 से अधिक वैरायटी रखी. इस तरीके से काम करना शुरू किया और अपने ब्रांड का नाम रखा बेकर्स कैफे. हमारी बिक्री की खास बात यह है कि हम कभी केक बनाकर नहीं रखते. आप आइए और बताइए आपको कैसा केक चाहिए, बिल्कुल वैसा हम 15 मिनट में दे देंगे.हमारी फ्रेशनेस और क्वालिटी ये दो चीजें हमारी पहचान हैं. बड़े-बड़े ऑफिसर्स और बिजनेस वर्क के लोग हमारे क्लाइंट हैं और जब उनके पास भी डिलीवरी जाती है तो हाथ लगाकर देखते हैं और केक काफी गर्म रहता है. वह हमें बताते भी हैं कि क्या आपने अभी तुरंत बनाया है. यह जो फ्रेशनेस है, यह लोगों को खूब पसंद आती है. मतलब लोग रोटी गरमा-गरम खाते हैं, हम बिस्कुट गरमा-गरम परोसते हैं.शालिनी बताती हैं, ‘आपको साधारण बिस्किट तो कहीं भी मिल जाएंगे लेकिन हमारे बिस्किट सबसे अलग होते हैं. दरअसल, हमारे पास मड़वा के बिस्किट होते हैं, जो एकदम क्रिस्पी और खाने में लाजवाब और फाइबर से भरे होते हैं. इसकी डिमांड तो इतनी है कि हमेशा आउट ऑफ स्टॉक हो जाता है. वहीं, मड़वा का केक भी हमारे पास है. यानी रागी केक और टेस्ट ऐसा कि हर दिन लगभग इसका ऑर्डर हमें मिल जाता है.आज आलम यह है कि पहले हमें किसी और के अंडर नौकरी करनी पड़ती थी, गुलामी करनी पड़ती थी. लेकिन आज खुद के बॉस बने हैं और महीने की अच्छी-खासी कमाई भी हो जाती है. पहले लगता था नौकरी चली गई, अब क्या होगा. लेकिन अब लगता है अच्छा हुआ चली गई. इसीलिए ऊपर वाले ने खुद का बॉस बनने का मौका दिया.’सबसे बड़ी बात यह है कि हमारी क्वालिटी आप बस एक बिस्किट खाकर देख लीजिए. लोग आते हैं, सिर्फ एक डेमो टेस्ट करते हैं और उसके बाद 5 पैकेट बिस्कुट सीधे उठा कर ले जाते हैं. क्योंकि हमारी बेकरी रांची से करीब 10 किमी की दूरी पर स्थित है. फिर भी लोग एक बार में ही अच्छी-खासी क्वांटिटी ले जाते हैं, ताकि बार-बार ना आना पड़े.

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