एक्सएलआरआइ में तीसरा अंतरराष्ट्रीय एथिक्स कॉन्फ्रेंस 2026 संपन्न, नैतिक नेतृत्व और सतत विकास पर वैश्विक विमर्श


जमशेदपुर : जमशेदपुर स्थित एक्सएलआरआइ – जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में तीसरे अंतरराष्ट्रीय एथिक्स कॉन्फ्रेंस 2026 का सफल आयोजन किया गया। यह तीन दिवसीय सम्मेलन जे.आर.डी. टाटा फाउंडेशन फॉर बिजनेस एथिक्स के तत्वावधान में 9 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित हुआ। सम्मेलन की थीम थी — रीइमैजिनिंग बिज़नेस एंड लीडरशिप: एथिक्स, सस्टेनेबिलिटी एंड द फ्यूचर ऑफ रिस्पॉन्सिबल ग्रोथ।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों से आए शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, छात्रों और प्रोफेशनल्स ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के संदर्भ में नैतिक नेतृत्व, सतत विकास और जिम्मेदार व्यापार मॉडल पर गंभीर और सार्थक संवाद को बढ़ावा देना था।
कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ डीन (एडमिनिस्ट्रेशन) डॉ. फादर डोनाल्ड डी’सिल्वा के स्वागत उद्बोधन से हुआ। औपचारिक उद्घाटन करते हुए एक्सएलआरआइ के निदेशक डॉ. फादर जॉर्ज सेबास्टियन ने कहा कि सच्चा नेतृत्व आक्रामक प्रतिस्पर्धा से नहीं, बल्कि करुणा, नैतिक विवेक और ईमानदारी से जन्म लेता है।
डीन (एकेडमिक्स) डॉ. संजय पात्रो और जेआरडी टाटा फाउंडेशन फॉर बिज़नेस एथिक्स के चेयरमैन डॉ. फादर जोसेफ मैथ्यू ने मुख्य वक्ताओं का स्वागत किया। सम्मेलन के दौरान कीनोट भाषण, पैनल चर्चाएं, लीडरशिप वर्कशॉप, शोध पत्र प्रस्तुतियां और फायरसाइड स्टोरीटेलिंग सत्र आयोजित किए गए।
प्रसिद्ध विचारक नवी राजू ने ‘जुगाड़’ और फ्रूगल इनोवेशन को सामाजिक भलाई के लिए जिम्मेदारी के साथ अपनाने पर बल दिया। वहीं डॉ. प्रसाद काइपा ने नेतृत्व को “स्मार्ट से वाइज़” बनने की यात्रा बताते हुए आत्मचिंतन और नैतिक चेतना को अनिवार्य बताया।
22 शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण
इस सम्मेलन की विशेषता यह रही कि यह भारतीय सामाजिक यथार्थ से गहराई से जुड़ा रहा। आदिवासी अर्थव्यवस्था, सामुदायिक नेतृत्व, महिला सशक्तिकरण, कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य और समावेशी विकास जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। कुल 100 से अधिक शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 22 का प्रस्तुतीकरण किया गया।
श्रेष्ठ एब्सट्रैक्ट पुरस्कार अर्पिता साहू, पंकज कुमार, डॉ. अभिजीत रॉय, अनुष्का अग्निहोत्री और अमित कुमार मोडक को प्रदान किए गए।
सम्मेलन में कुल 8 आमंत्रित वक्ताओं और 80 से अधिक प्रतिभागियों ने हाइब्रिड मोड में हिस्सा लिया। फायरसाइड स्टोरीटेलिंग सत्र में कला, संगीत और आत्ममंथन का अनूठा संगम देखने को मिला। इसके अलावा आदिवासी महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी ने नैतिक उद्यमिता और टिकाऊ आजीविका का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया।
समापन सत्र में डॉ. फादर जोसेफ मैथ्यू ने एक्सएलआरआइ की उस निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसके तहत संस्थान नैतिक, सामाजिक रूप से संवेदनशील और मानवीय मूल्यों से युक्त नेतृत्व तैयार करने के लिए सतत प्रयासरत है।



