उत्तर प्रदेश में बिजली कीमतों को लेकर बड़ा फैसला यूपी बिजली नियामक आयोग ने लिया


लखनऊ:उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं को बड़ी खुशखबरी दी है. आयोग ने लगातार छठवें साल कीमतों में वृद्धि नहीं करने का फैसला किया है. दरअसल, बिजली कंपनियां लगातार कीमतों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव दे रही हैं, लेकिन विद्युत उपभोक्ता परिषद इसका विरोध कर रहा है, उसका कहना है कि जब बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का हजारों करोड़ बकाया है तो रेट बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है. यही है कि बिजली कीमतों में बढ़ोतरी को अनुमति नहीं दी गई है.
उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिजली कीमतों को यथावत रखने का निर्णय किया है. उसने सभी श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं को बिजली दरों में बदलाव नहीं करने का निर्णय किया है. UPERC ने बिजली वितरण में हानि को भी कम करने का रुख दिखाया है. उसने UPPCL से पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को वित्त वर्ष 2024-25 में 13.78 फीसदी से घटाकर वित्त वर्ष 29-30 तक 10.74 फीसदी तक कम करने को कहा है.आयोग ने कहा कि सभी बिजली उपभोक्ताओं को ग्रीन एनर्जी टैरिफ से फायदा होगा.आयोग का कहना है कि मध्यांचल और पश्चिमांचल डिस्कॉम ने ही वित्त वर्ष 24-25 में हानि से जुड़े टारगेट को पूरा किया है. लेकिन पूर्वांचल बिजली वितरण निगम का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है.
आयोग ने कहा है कि घरेलू और कॉमर्शियल विद्युत उपभोक्ता, ग्रामीण क्षेत्रों के शेड्यूल्ड मीटर और प्राइवेट ट्यूबवेल में इलेक्ट्रिसिटी रेट नहीं बदलेगा. आयोग ने सभी डिस्कॉम से सिक्योरिटी डिपॉजिट के ब्याज पर टीडीएस सर्टिफिकेट के लिए उपभोक्ताओं का पैन डिटेल लेने को कहा है. मल्टीस्टोरी बिल्डिंग और टाउनशिप के लिए बिजली बिलों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए आगे और विचार विमर्श का संकेत दिया है.नियामक आयोग मल्टी स्टोरी बिल्डिंग और टाउनशिप से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए एक अलग कंसल्टेशन पेपर जारी करेगा। आयोग ने पांच राज्य डिस्काम के एआरआर को मंजूरी देते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 163,778.24 मिलियन यूनिट बिजली की खरीद के लिए 1,10,993.33 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व आवश्यकता को मंजूरी दी है।बिजली कंपनियों द्वारा 164,592.49 मिलियन यूनिट बिजली की खरीद के लिए 1,12,865.33 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दाखिल किया था। इसके साथ ही बिजली कंपनियों के लिए दावा किए गए 13.77 प्रतिशत वितरण घाटे की जगह 13.35 प्रतिशत वितरण घाटे को मंजूरी दी है। राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले सब्सिडी को 17,100 करोड़ रुपये मंजूर किया है।




