दिल्ली में गंदे पानी की डरावनी सच्चाई, 2800 किमी पाइपलाइन 30 साल पुरानी


दिल्ली: राजधानी में दूषित पेयजल की समस्या की जड़ जमीन के नीचे दबी दशकों पुरानी पाइपलाइनें हैं। दिल्ली जल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार राजधानी की 15,600 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन में से 2,800 किलोमीटर यानी करीब 18 प्रतिशत लाइनें 30 वर्ष से अधिक पुरानी हो चुकी हैं।कई इलाकों में पाइपलाइन की उम्र 50 से 80 साल तक पहुंच गई है, जिससे घरों तक पहुंचने वाला पानी अक्सर दूषित हो जाता है। इस मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट और एनजीटी कई बार कड़ी टिप्पणी कर चुके हैं।दिल्ली अपनी लगभग 90 प्रतिशत पेयजल जरूरतों के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है, इसके बावजूद जल उपचार संयंत्रों से निकलने वाले पानी का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा रिसाव, चोरी और तकनीकी खामियों के कारण उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचता। कई जगह पेयजल लाइन के साथ सीवर लाइन बिछी होने से पानी दूषित हो रहा है।मौजूदा सरकार ने पिछले 11 महीनों में पानी को लेकर कड़े फैसले लिए हैं. अब तक 7,212 करोड़ रुपये के 94 बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. अनधिकृत कॉलोनियों और गांवों तक पानी पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है. अब तक 262 नए ट्यूबवेल चालू किए जा चुके हैं. करीब 200 किलोमीटर नई पाइपलाइन डाली गई है. कई कॉलोनियों में तो पहली बार नियमित रूप से पानी पहुंच रहा है. पल्ला, बिजवासन और सिरसपुर में नए अंडरग्राउंड रिज़र्वॉयर (UGR) बनाए गए हैं.पाइपलाइन बदलने के साथ-साथ सरकार पानी की मात्रा बढ़ाने पर भी काम कर रही है. हिमाचल प्रदेश से 113 MGD अतिरिक्त पानी लेने के लिए बातचीत चल रही है. इसके अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी 51 क्यूसेक पानी के लिए चर्चा जारी है. पानी की बर्बादी रोकने के लिए मुनक नहर और DSB कैनाल की मरम्मत की जा रही है. कंड्यूट पाइपलाइन पर स्टडी के लिए IIT रुड़की की मदद ली जा रही है. द्वारका वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता भी 20 MGD बढ़ाई गई है.




