उषा मार्टिन विश्वविद्यालय में झारखंड की संस्कृति और समुदायों पर आधारित वृत्तचित्रों की विशेष स्क्रीनिंग

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रांची: उषा मार्टिन विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार संकाय द्वारा दो छात्र-निर्मित वृत्तचित्रों — द फॉरगॉटन फिशरमेन और नीर गाथा — की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई। इस अवसर पर प्रख्यात फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता श्री मेघनाथ जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मधुलिका कौशिक, प्रो-वाइस चांसलर प्रो. मिलिंद, और रजिस्ट्रार डॉ. शिव प्रताप वर्मा भी शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री मेघनाथ जी के स्वागत एवं सम्मान से हुआ। श्री मेघनाथ जी पिछले चार दशकों से झारखंड की आदिवासी और वंचित समुदायों के जीवन, संघर्ष और संस्कृति को अपनी फिल्मों के माध्यम से सामने लाते रहे हैं। उन्हें दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उनके प्रमुख वृत्तचित्रों में नाची से बांची, लोहा गरम है और डेवलपमेंट फ्लोज फ्रॉम द बैरल ऑफ द गन शामिल हैं।
पहला वृत्तचित्र द फॉरगॉटन फिशरमेन गेटलसुड डैम के पास निवास करने वाले नायक समुदाय के जीवन और आजीविका पर केंद्रित था, जिसमें विकास परियोजनाओं से उत्पन्न चुनौतियों को संवेदनशीलता के साथ दिखाया गया। इस फिल्म के निर्माण में फिल्मकार श्री बिजू टोप्पो का मार्गदर्शन रहा।
दूसरा वृत्तचित्र नीर गाथा झारखंड के प्रसिद्ध झरनों — जोन्हा, हुन्द्रू, दशम और सीता फॉल्स — की प्राकृतिक सुंदरता के साथ उनसे जुड़ी लोककथाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को खूबसूरती से प्रस्तुत करता है।
कुलपति प्रो. मधुलिका कौशिक ने छात्रों की सृजनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि दृश्य माध्यम स्थानीय विरासत को संरक्षित करने का सशक्त साधन है। मुख्य अतिथि श्री मेघनाथ जी ने भी विद्यार्थियों की प्रतिबद्धता और संवेदनशील दृष्टिकोण की प्रशंसा की।
कार्यक्रम का समापन छात्र फिल्म निर्माताओं, मार्गदर्शकों और संकाय सदस्यों की सराहना के साथ हुआ, जिससे उषा मार्टिन विश्वविद्यालय की यह प्रतिबद्धता पुनः सशक्त हुई कि वह सामाजिक रूप से जागरूक और रचनात्मक कहानीकारों को तैयार करने के लिए सतत प्रयासरत है।

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