बंगाली साहित्य जगत का चमकता सितारा शंकर नहीं रहे, पीएम मोदी ने जताया गहरा शोक


कोलकाता : प्रसिद्ध बंगाली साहित्यकार मणि शंकर मुखर्जी, जिन्हें पाठक प्यार से ‘शंकर’ के नाम से जानते थे, का शुक्रवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे कोलकाता के एक निजी अस्पताल में लंबे समय से इलाजरत थे और दोपहर में उन्होंने अंतिम सांस ली। शंकर बंगाली साहित्य के उन विरल लेखकों में से थे, जिन्होंने अपने लेखन में आम आदमी के संघर्ष और जीवन के अनुभवों को अत्यंत गहराई और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। उनकी कई रचनाएँ जैसे ‘चौरंगी’, ‘सीमाबद्ध’ और ‘जन अरण्य’ आज भी पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने शंकर को बंगाली साहित्य का एक महान व्यक्तित्व बताया और कहा कि उनकी अविस्मरणीय रचनाओं ने कई पीढ़ियों के पाठकों को प्रभावित किया और भारतीय साहित्य को समृद्ध किया। मोदी ने उनके परिवार, मित्रों और प्रशंसकों के प्रति अपनी संवेदनाएं भी जताई। शंकर की लेखनी का सिनेमा से भी गहरा संबंध रहा। उनके उपन्यास ‘चौरंगी’ पर 1968 में फिल्म बनी और अन्य कई रचनाओं को महान निर्देशक सत्यजीत रे ने बड़े पर्दे पर उतारा।उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर है। बंगाली साहित्य के प्रेमियों ने सोशल मीडिया पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है और कहा कि उन्होंने आम जीवन की कहानियों को भाषा दी.




