एमजीएम अस्पताल में दवाओं का गंभीर संकट, डिप्टी सुपरिटेंडेंट ने लापरवाह अधिकारियों को लगाई फटकार

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जमशेदपुर : शहर के प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य संस्थान एमजीएम अस्पताल में दवाओं की भारी कमी को लेकर हड़कंप मचा हुआ है। अस्पताल में दवाओं का संकट इतना गंभीर हो गया है कि मरीजों को प्रतिदिन हजारों रुपये की दवाएं निजी मेडिकल दुकानों से खरीदनी पड़ रही हैं।

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मंगलवार को अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. जुझार माझी ने छह महत्वपूर्ण विभागों की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान अधूरी डायग्नोस्टिक सुविधाओं और दवा आपूर्ति में देरी को लेकर उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।

समीक्षा में सामने आया कि 800 से अधिक दवाओं के लिए लगभग दो महीने पहले टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक दवाएं मरीजों तक नहीं पहुंची हैं। इस पर डॉ. माझी ने स्टोर और फार्मेसी विभाग का औचक निरीक्षण किया और देरी के कारणों की जानकारी मांगी। जवाब से असंतुष्ट होने पर उन्होंने बुधवार को दवा स्टॉक का विशेष ऑडिट कराने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाएगा कि आपूर्ति प्रक्रिया में अड़चन कहां है। “मरीजों को अस्पताल से 100 प्रतिशत दवाएं उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है,” उन्होंने स्पष्ट किया।

केंद्रीय पैथोलॉजी विभाग चार महीने से लंबित

समीक्षा के दौरान प्रस्तावित सेंट्रल पैथोलॉजी विभाग की धीमी प्रगति पर भी सवाल उठाए गए। यह विभाग पिछले वर्ष नवंबर के अंतिम सप्ताह तक शुरू होना था, लेकिन फरवरी के मध्य तक भी कार्य अधूरा है।

इस देरी के कारण गरीब मरीजों को निजी लैब में महंगे जांच कराने पड़ रहे हैं। डॉ. माझी ने बताया कि वे प्राचार्य डॉ. संजय कुमार और अधीक्षक डॉ. बलराम झा के साथ जल्द बैठक कर विभाग को शीघ्र चालू कराने की दिशा में कदम उठाएंगे।

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जन्म प्रमाणपत्र विभाग को चेतावनी

जन्म प्रमाणपत्र विभाग में भी अनियमितताएं पाई गईं। स्थानीय लोगों की शिकायत थी कि प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। डिप्टी सुपरिटेंडेंट ने संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वे जन शिकायतों का त्वरित समाधान करें और अनावश्यक देरी समाप्त करें।

जल्द तय होगी जवाबदेही

डॉ. माझी ने कहा कि अस्पताल की छवि सुधारने के लिए हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हुई तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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