पढ़िए…जिला आपूर्ति विभाग का सनसनीखेज भ्रष्ट कारनामा 2
राज्य खाद्य गोदाम की अगलगी की गुत्थी को क्यों सुलझाने में विफल है डीएसओ?

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सरायकेला:- ग़म्हरिया प्रखंड परिसर स्थित राज्य खाद्य निगम गोदाम में लगी आग की गुत्थी सुलझाने में आदित्यपुर थाना पुलिस और जिला आपूर्ति विभाग पूरी तरह विफल रहा है। यह पूरा मामला करीब ढाई से तीन करोड़ का है। जबकि जिस प्रकार लाभुकों की शिकायत लगातार  खाद्यान्न नहीं मिलने की है, उस समस्या को गंभीरता से देखने पर यह मामला साल में करोड़ों की हो सकती है। इस बड़े मामले की जांच को लेकर शीघ्र ही पब्लिक स्तर पर एक कमेटी गठित कर साक्ष्य सहित पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय एजेंसी को देने की तैयारी चल रही है। बताया गया कि प्रखंड को प्रत्येक माह करीब 5245 क्विंटल चावल एवं करीब 1300 क्विंटल गेहूं की आपूर्ति की जाती है। इसमें डिमांड के अनुसार घटता बढ़ता भी है। अगर देखा जाय तो दो माह के खाद्यान्न की कीमत ढाई से तीन करोड़ की हो जाती है। हालांकि इसमें कुछ डीलरो तक अगर राशन मुहैया भी कराया गया तो वह लाभुक तक नहीं पहुंच पाया। यह तो महज दो माह का है। विगत 28 अक्टूबर को लगी आग के 50 दिन से अधिक बीत जाने के बाद भी अभी तक प्रखंड में खाद्यान्न आपूर्ति की स्थिति सामान्य नहीं हो पाया है। प्रखंड के लाभुकों को अक्टूबर और नवंबर माह का राशन के लिए जहां दर दर भटकना पड़ा, वहीं दिसंबर माह का राशन के लिए उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। बताया गया कि गोदाम में आग लगने के बाद जिला आपूर्ति पदाधिकारी अभी तक स्थिति को सामान्य बनाने में अक्षम साबित हो रहे हैं। गोदान में कितना क्विंटल खाद्यान्न जला, इसका पुख्ता क्वांटिटी जनता को नहीं मिल पाया है। इस मामले को दबा कर रखा गया है। बताया गया कि प्रखंड में अन्य दो गोदाम भी है। जहां खाद्यान्न भरा हुआ है। किंतु आग लगने के कई दिनों बाद खाना पूर्ति के लिए उक्त गोदाम को तो सील कर दिया गया, किंतु इसके साथ के अन्य गोदामों को सील नहीं किया गया। मिली जानकारी के अनुसार डीएसओ स्वयं अन्य दोनों गोदामों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। बताया गया कि इन दोनों गोदामों को सील नहीं करने को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही है। बताया गया कि आखिर इस बड़े मामले की 50 दिनों बाद भी कोई उद्भेदन क्यों नहीं हुआ। जिले में खाद्यान्न का मालिक डीएसओ है। गोदाम प्रबंधक भी वही है। फिर इतने बड़े पैमाने पर खाद्यान्न की हेराफेरी होने, गोदाम में आग लगने, इसमें एजीएम एवं डीएसडी की जलकर मौत होने से लेकर कई बड़े सवालों को आखिर 50 दिनों तक ठंडे बस्ते में डालकर रखने का मकसद क्या हो सकता है।


क्रमशः….

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