रांची : कानून सड़क पर उतरा, पहचान कुर्सी पर बैठ गई ? वीवीआईपी बॉडीगार्ड को रोकना थानेदार को पड़ा भारी, बिना जांच लाइन हाजिर

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रांची: राजधानी रांची में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने कानून की बराबरी और व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के शहीद चौक का है, जहां वाहन जांच के दौरान एक वीवीआईपी के बॉडीगार्ड की स्कूटी रोके जाने पर विवाद इतना बढ़ा कि महज एक घंटे के भीतर थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया—वह भी बिना किसी विभागीय जांच के।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कोतवाली थाना प्रभारी आदिकांत महतो वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर शहीद चौक के पास वाहन चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान स्कूटी सवार एक जवान को जांच के लिए रोका गया। जांच में जवान ने खुद को वीवीआईपी का बॉडीगार्ड बताया। आरोप है कि इसी बात को लेकर थानेदार और जवान के बीच तीखी बहस हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जवान ने कथित तौर पर थानेदार को धमकी दी कि वह मिनटों में ट्रांसफर करवा देगा।

विवाद बढ़ने पर जवान ने सड़क पर स्कूटी छोड़ दी और अपने वीवीआईपी को फोन कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सिटी एसपी स्वयं मौके पर पहुंचे और स्थिति संभालने का प्रयास किया, लेकिन बॉडीगार्ड के तेवर नरम नहीं पड़े। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी असहज नजर आए।

कुछ ही देर बाद, देर रात थाना प्रभारी आदिकांत महतो को लाइन हाजिर कर दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि इस कार्रवाई से पहले न तो कोई विभागीय जांच हुई और न ही थानेदार का पक्ष सुना गया। फिलहाल खबर लिखे जाने तक कोतवाली थाने में नए थाना प्रभारी की पोस्टिंग नहीं की गई है।

सूत्रों के मुताबिक, संबंधित वीवीआईपी कोई और नहीं बल्कि हाईकोर्ट के माननीय जज हैं। बताया जा रहा है कि उनके बॉडीगार्ड को रोका जाना नागवार गुजरा और मामला यहीं से नियम-कानून से आगे ‘पहचान’ तक पहुंच गया। सवाल यह है कि जब कानून सबके लिए समान है, तो क्या वीवीआईपी, उनके परिजन या अंगरक्षकों के लिए अलग नियम हैं?

यह घटना पुलिस बल के मनोबल और निष्पक्ष कानून-व्यवस्था पर सीधा असर डालती है। जब सड़क पर ड्यूटी निभाने वाले जवान को बिना जांच दंडित कर दिया जाए, तो संदेश क्या जाएगा? क्या कानून किताबों में ही रहेगा और सड़क पर पहचान चलेगी?

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