बंगाल के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर BLOs पर उठा सवाल — मतदाता आश्वस्त, कहा गया “चिंता न करें, आपका नाम नहीं कटेगा”

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पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया अब चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस अभियान में बूथ-स्तर अधिकारी (BLOs) घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण जमा कर रहे हैं, जिसके चलते कई नागरिकों में यह डर गया है कि कहीं उनका नाम वोटर सूची से कट न जाए।

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राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि “किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा”, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इसके लिए लोगों को फॉर्म भरने और अपनी जानकारी सत्यापित कराने की जरूरत होगी।

चार नवंबर से शुरू हुई इस कवायद में BLOs ने पहले दिन तक साढ़े-आठ लाख फॉर्म्स वितरित किए हैं। हालांकि, तकनीकी समस्याएँ भी सामने आई हैं — जैसे QR-कोड स्कैनिंग में त्रुटि, और कुछ इलाकों में फॉर्म्स की कमी भी जताई गई है।

मतदाताओं को सलाह दी गई है कि वे अपने वोटर आईडी कार्ड (EPIC), आधार कार्ड व पासपोर्ट-साइज फोटो तैयार रखें और BLO के आने पर फॉर्म दोहरी प्रतियों में भरें। यदि आपका नाम 2002 की सूची में नहीं है तो बाद में सुनवाई का मौका भी मिलेगा।

विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रक्रिया का राजनीतिक महत्व बहुत है क्योंकि यह आगामी विधानसभा चुनाव से पहले व्यापक मतदाता डेटा को अपडेट करना है। वहीं, विपक्ष इसे NRC-से जोड़कर देख रहा है और सवाल उठा रहा है कि क्या यह सिर्फ एक सूची सुधार है या गुप्त प्रविष्टियों के खिलाफ अभियान।

इस बीच, मतदाता खुद बोल रहे हैं कि उन्हें बेहतर जानकारी और समय से दिशा-निर्देश मिले तो वे प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल होंगे। राज्य सरकार ने इस अभ्यास को “सबका वोटर लिस्ट पक्का” करार दिया है, जिसमें किसी भी योग्य मतदाता को अनदेखा नहीं किया जाएगा।

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