आरएसएस के संगठन ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी,


दिल्ली: आरएसएस की जिस संगठन क्षमता से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह खासे प्रभावित हैं, उसमें आमूल-चूल परिवर्तन पर विचार हो रहा है. आरएसएस के शताब्दी वर्ष के समापन के बाद संघ इस बारे में अंतिम निर्णय कर सकता है. इसमें जमीनी स्तर पर संघ के ढांचे को मजबूत करना और संगठन का विकेंद्रीकरण करना शामिल है. आरएसएस सूत्रों के अनुसार अगले साल मार्च में होने वाली आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में इस बारे में निर्णय किया जा सकता है. यह संघ की सर्वोच्च निर्णायक संस्था है जिसमें सारे बड़े फैसले किए जाते हैं.
संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में ऐसा करना तय हुआ था। इसे अब मार्च में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की मीटिंग में रखा जाना था। लेकिन उससे पहले ही यह जानकारी मीडिया में आ गई है। संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक ने बताया कि 2026-27 से इस नई व्यवस्था को लागू किया जा सकता है। इसके तहत अब प्रांत प्रचारक की जगह संभाग प्रचारक लेंगे, जिसके तहत दो कमिश्नरी को मिलाकर एक संभाग प्रचारक होगा। अब तक प्रांत प्रचारक का क्षेत्र बड़ा होता था, लेकिन संभाग प्रचारक का एरिया थोड़ा कम होगा। इससे समन्वय और जमीनी स्तर तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं क्षेत्र प्रचारक की व्यवस्था को खत्म किया जा रहा है।

अब क्षेत्र प्रचारक की जगह राज्य प्रचारक होंगे। आरएसएस की व्यवस्था में ऐसा पहली बार होगा। इससे पहले क्षेत्र प्रचारक होते थे, जो कई बार दो, तीन या फिर उससे अधिक प्रांतों को मिलाकर बने क्षेत्र में काम देखते थे। अब राज्य प्रचारक होंगे और इनका काम स्टेट लेवल पर होगा। इसके तहत एक राज्य में एक राज्य प्रचारक होगा और पहले की तरह दो क्षेत्र प्रचारक नहीं होंगे। माना जा रहा है कि इससे पूरे राज्य का समन्वय बेहतर होगा। जैसे यूपी का ही उदाहरण लें तो अब तक एक क्षेत्र प्रचारक पूर्वी यूपी का होता था, जिसके अंतर्गत अवध, काशी, गोरक्ष और कानपुर प्रांत आते थे।



