आकाशवाणी की जमीन पर कब्जे की साज़िश नाकाम — सफेदपोश गिरोह की मिलीभगत के संकेत


आदित्यपुर: आकाशवाणी जमशेदपुर के मुख्य गेट के सामने की जमीन विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है, और सारे तथ्य साफ संकेत दे रहे हैं कि 1989 में स्थापित केंद्र सरकार के इस रेडियो स्टेशन के बिल्कुल सामने अतिक्रमण की सुनियोजित कोशिश की गई है। सूत्रों के अनुसार आदित्यपुर क्षेत्र में जमीन कब्जा कराने वाला एक सक्रिय गिरोह काम करता है, जिसमें कुछ सफेदपोश लोग गारंटी देकर मोटी रकम की डील कराते हैं, और प्रथम दृष्टया यह मामला भी उसी नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है। आकाशवाणी प्रबंधन की शिकायत पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी रुकवाई और लगाए जा रहे पिलर उखाड़ने का निर्देश दिया, जबकि दावेदार राजीव कुमार का दावा कई सवाल खड़े करता है—उन्होंने न कभी आकाशवाणी से संपर्क किया, न कोई पत्राचार किया, न किसी प्रकार की सूचना दी, फिर भी वह सीधे सरकारी प्रसारण केंद्र के सामने की जमीन को अपनी संपत्ति बताने लगे, जो अति आश्चर्यजनक और संदिग्ध है। भू-अर्जन कार्यालय के दस्तावेज बताते हैं कि यह जमीन मूल रैयत की 34 डिसमिल थी, जिसमें से 30 डिसमिल झारखंड राज्य आवास बोर्ड द्वारा विधिवत अधिग्रहित कर ली गई है, राशि का भुगतान भी हो चुका है, और सरकारी दस्तावेजों में भूमि राज्य उपयोग में दर्ज है, ऐसे में निजी स्वामित्व का दावा तथ्यात्मक रूप से कमजोर और अप्रासंगिक साबित होता है। नगर निगम ने भी बिना अनुमति घेराबंदी को नियमों का उल्लंघन बताते हुए नोटिस जारी किया है, वहीं अंचल कार्यालय ने संपूर्ण रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। मामले में जिस तरह अचानक घेराबंदी शुरू की गई और आकाशवाणी को बाईपास कर सीधे कब्जे का प्रयास किया गया, उससे साफ जाहिर होता है कि यह केंद्रीय संस्थान की जमीन पर प्रभावशाली गिरोह की मिलीभगत से अतिक्रमण का प्रयास था, जिसे समय रहते आकाशवाणी प्रबंधन और पुलिस की तत्परता ने विफल कर दिया, और अब जांच के बाद सच्चाई साफ होने की पूरी उम्मीद है।




