जैतून का तेल बनाम सरसों का तेल: स्वास्थ्य के लिए कौन सा बेहतर है?…

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लोक आलोक न्यूज सेंट्रल डेस्क:जब खाना पकाने के तेल की बात आती है, तो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक व्यक्ति अक्सर खुद को जैतून के तेल और सरसों के तेल के बीच फंसा हुआ पाते हैं। दोनों तेलों में अद्वितीय गुण और स्वास्थ्य लाभ हैं जो उन्हें अलग बनाते हैं। यह निर्धारित करने के लिए कि स्वास्थ्य के लिए कौन सा बेहतर है, आइए उनके पोषण प्रोफाइल, लाभ और संभावित कमियों पर गौर करें।

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पोषण प्रोफ़ाइल:

जैतून का तेल:

जैतून का तेल, विशेष रूप से अतिरिक्त कुंवारी जैतून का तेल, मोनोअनसैचुरेटेड वसा की समृद्ध सामग्री के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ एक विश्लेषण है:

मोनोअनसैचुरेटेड वसा: जैतून के तेल की कुल वसा सामग्री का लगभग 73% मोनोअनसैचुरेटेड वसा है, मुख्य रूप से ओलिक एसिड, जो हृदय स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है।

पॉलीअनसेचुरेटेड वसा: जैतून के तेल में थोड़ी मात्रा में पॉलीअनसेचुरेटेड वसा होती है, जिसमें ओमेगा -3 और ओमेगा -6 फैटी एसिड शामिल होते हैं।

संतृप्त वसा: जैतून के तेल का लगभग 14% संतृप्त वसा होता है।

एंटीऑक्सीडेंट: जैतून का तेल विटामिन ई और पॉलीफेनॉल जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जिसमें सूजन-रोधी गुण होते हैं।

सरसों का तेल:

सरसों के तेल का एक अलग स्वाद और संरचना होती है:

मोनोअनसैचुरेटेड वसा: सरसों के तेल की वसा सामग्री का लगभग 60% मोनोअनसैचुरेटेड वसा है।

पॉलीअनसेचुरेटेड वसा: सरसों के तेल में ओमेगा-3 (अल्फा-लिनोलेनिक एसिड) और ओमेगा-6 फैटी एसिड सहित पॉलीअनसेचुरेटेड वसा की मात्रा अधिक होती है।

संतृप्त वसा: सरसों के तेल का लगभग 12% संतृप्त वसा होता है।

अन्य घटक: सरसों के तेल में इरुसिक एसिड होता है, एक ऐसा यौगिक जो स्वास्थ्य संबंधी बहस का विषय रहा है।

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