शिक्षा जगत में Mrs.के उमा का महत्वपूर्ण योगदान: 1980 से अब तक का सफर…



लोक आलोक सेन्ट्रल डेस्क:यूं तो हर किसी के जीवन में शिक्षक या शिक्षिका का योगदान महत्वपूर्ण होता है। लेकिन इस क्षेत्र में लंबे समय तक बने रहना भी एक अचीवमेंट होता है। आज के इस स्टोरी में हम बात करेंगे मिसेज के uma की। शिक्षा के क्षेत्र में Mrs. के उमा का योगदान अनुकरणीय और प्रेरणादायक रहा है। 1980 में DBMS इंग्लिश स्कूल में इतिहास, भूगोल और अंग्रेजी पढ़ाने के साथ अपने करियर की शुरुआत करने वाली Mrs. उमा ने मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) से अपनी पूरी शिक्षा प्राप्त की थी। 10 वर्षों के अनुभव के साथ जब वह इस स्कूल से जुड़ीं, तब से उन्होंने न केवल शैक्षणिक कार्यों में बल्कि पाठ्यक्रम और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

1993 में Mrs. उमा को DBMS करियर अकादमी का उप-प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया, और उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए 1999 में उन्हें इसी अकादमी का प्रधानाचार्य बनाया गया। उनके मार्गदर्शन में स्कूल ने कई उपलब्धियाँ हासिल कीं, और शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने कई सुधार और नवाचार किए। उनके नेतृत्व में छात्रों को न केवल शैक्षणिक, बल्कि विविध गतिविधियों में भी बेहतरीन अवसर प्राप्त हुए।
IT कोर्स के क्षेत्र में भी Mrs. उमा का योगदान अद्वितीय रहा। उन्होंने KSOU (कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी) के IT कोर्सेस की समन्वयक के रूप में काम किया। इसके साथ ही, MKU (मदुरै कामराज विश्वविद्यालय) के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की कार्यक्रम अधिकारी के रूप में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दीं। 2018 तक उन्होंने ऑनलाइन परीक्षाओं की सुपरिंटेंडेंट के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, जिससे डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी उनकी पहचान बनी।
Mrs. उमा के करियर में उनकी सक्रियता और बहुआयामी प्रतिभा की वजह से उन्हें हर जगह सराहा गया। वर्तमान में वह ‘वैली व्यू स्कूल’ (टेल्को) की सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं और शिक्षा जगत में उनका यह सफर प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
Mrs. उमा को एक ऑलराउंडर के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने शैक्षणिक से लेकर सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों तक हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी है।
