मैकलुस्कीगंज की मेगलिथ धरोहर ने झारखंड को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर खोला नया मार्ग


झारखंड:झारखंड, मैकलुस्कीगंज क्षेत्र में स्थित प्राचीन मेगलिथ संरचनाओं और अंग्रेज-कालीन वास्तुकला को प्रदेश सरकार ने अब वैश्विक पर्यटन पहचान देने का नया लक्ष्य बनाया है। छोटे-छोटे पत्थर स्तंभ, भित्ति-चित्र और पुराने एंग्लो-इंडियन बंगलों के संयोजन ने इस स्थान को ‘छोटा इंग्लैंड’ कहे जाने योग्य बना दिया है।

पर्यटन विभाग के अनुसार, मैकलुस्कीगंज को 64 किमी दूर राजधानी रांची से जोड़ने वाली सड़कों के उन्नयन, ट्रेकिंग ट्रेल्स, नदी किनारे गेस्टहाउस और होम-स्टे सुविधाओं के विकास से यह स्थल नए निवेश-और-आगमन केंद्र के रूप में उभर रहा है।
स्थानीय ग्रामीण आबादी को कमर्शियल होम-स्टे, गाइड प्रशिक्षण, हस्तशिल्प व्यवसाय जैसे विकल्प दिए जा रहे हैं जिससे समावेशी पर्यटन-मॉडल का निर्माण हो रहा है।
विशेष रूप से, मेगलिथ का अध्ययन अब सिर्फ पुरातात्विक दृष्टि से नहीं बल्कि संस्कृति-पर्यटन के रूप में देखने की योजना है। राज्य सरकार ने एक ब्रांडिंग अभियान भी शुरू किया है जिसमें मैकलुस्कीगंज की “हिल वरारिटी”, “एंग्लो-इंडियन विरासत” और “प्रकृति-संगीत” को जोड़ कर प्रस्तुत किया गया है।
हालांकि चुनौतियाँ अभी भी हैं—उदाहरण के लिए ठोस आवास-संरचना, परिवहन-माध्यमों की कमी और उच्च-मानदंड होटल्स की उपलब्धता। पर्यटन विभाग ने अगले चरण में इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए विशेष बजट और निजी भागीदारी को शामिल करने के लिए पहल की है।
यह पहल झारखंड को सिर्फ खनिज-उद्योग राज्य से हिल वीकेंड-डेस्टिनेशन में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। स्थानीय अर्थव्यवस्था में नया जीवन आएगा, साथ-ही-साथ भारत के संदर्भ में मैकलुस्कीगंज जैसी जगहों को “अदूरी पर्यटन” से “लक्षित पर्यटन” में बदलने का अवसर मिलेगा।



