अब आसान नहीं है जयपुर में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना,


जयपुर: में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया अब पहले जैसी आसान नहीं रही। राजधानी स्थित आरटीओ कार्यालय में ऑटोमैटेड ड्राइविंग ट्रायल ट्रैक शुरू होने के बाद लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है। नई प्रणाली लागू होते ही इसके असर भी सामने आने लगे हैं। बीते तीन दिनों में केवल 40 लोगों ने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया, जिनमें से महज तीन अभ्यर्थी ही परीक्षा में सफल हो सके। इस तरह पास होने का प्रतिशत करीब 7.5 रहा।परिवहन विभाग ने सोमवार से जगतपुरा आरटीओ में ऑटोमेटेड ट्रैक पर स्थाई लाइसेंस का ट्रायल लेना शुरू कर दिया है। अभी इसे दो-तीन दिन ट्रायल बेस पर चलाया जा रहा है। लेकिन आवेदकों को टेस्ट पूरी तरह ऑटोमेटेड ट्रायल सिस्टम पर ही देना होगा। वाहन चालक के ट्रायल की हर गतिविधि सॉफ्टवेयर के जरिए रिकॉर्ड होगी और ट्रायल के तुरंत बाद परिणाम प्रिंट होकर मिल जाएगा।जल्द ही इस सिस्टम को वाहन पोर्टल से जोड़ दिया जाएगा, जिसके बाद ट्रायल का रिजल्ट सीधे आवेदक के मोबाइल पर मैसेज के जरिए पहुंचेगा। इससे परिवहन निरीक्षकों की भूमिका लगभग खत्म हो जाएगी और एजेंटों का दखल भी बंद होगा।
शहर में लाइसेंस के लिए दो अलग-अलग तरीके क्यों?

जनता के नजरिए से देखें तो यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने वाली जरूर है। लेकिन पूरी तरह परेशानी-मुक्त नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही शहर में लाइसेंस के लिए दो अलग-अलग तरीके क्यों? जहां जगतपुरा में ऑटोमेटेड ट्रायल सिस्टम लागू किया गया है। वहीं, विद्याधर नगर आरटीओ में अब भी मैनुअल ट्रायल ही होंगे। ऐसे में आशंका है कि जो लोग ऑटोमेटेड ट्रायल से बचना चाहेंगे, वे विद्याधर नगर या आसपास के डीटीओ कार्यालयों का रुख करेंगे।आम लोगों की एक और चिंता खर्च को लेकर है। ऑटोमेटेड ट्रायल शुरू होने के साथ ही स्थायी लाइसेंस के शुल्क में 250 रुपए की बढ़ोतरी हो गई है। अब पुरुष आवेदकों को 800 की जगह 1050 रुपए और महिला आवेदकों को 700 की जगह 950 रुपए देने होंगे। पहले से महंगाई से जूझ रही जनता के लिए यह अतिरिक्त बोझ कम नहीं है।



