जियाडा में फ़ाइलों अटका उद्योग स्थापना, प्राप्त हुए 895 आवेदन, आवंटन शून्य, 374 आवेदन रिजेक्ट, पजेशन भी नहीं दिया गया उद्यमी हो रहे परेशान


saraiklea :- जियाडा की धीमी प्रक्रिया के कारण झारखं में निवेश तेजी से घट रहा है. कोल्हान में झारखंड इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जियाडा) उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि जियाडा की देरी और असमंजस के कारण निवेशक झारखंड से मुंह मोड सकते हैं. यदि स्थिति नहीं सूधरी तो पड़ोसी राज्यों की ओर पूंजी का रुख होग, जिससे रोजगार और औद्योगिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ेगा. फिलहाल उद्यमी जियाडा से प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज करने की मांग कर रहे हैं, ताकि झारखंड में उद्योग लगाने की राह आसान हो सके और राज्य की औद्योगिक छवि को मजबूती मिल सके. जियाडा की सुस्त कार्यप्रणाली से औद्योगिक माहौल प्रभावित हो रहा है. निवेश और उद्योग को बढ़ावा देनेके लिए बनाए गए इस तंत्र ने अबतक एक भी आवेदक को जमीन का पजेशन नहीं दिया है.इससे न केवल उद्यमी निराश हैं, बल्कि राज्य में निवेश की संभावनाओं पर भी.सवाल खड़े हो गए हैं. भूमि आवंटन की प्रक्रिया काफी धीमी है. इससे उद्यमियों में अनिश्चितता बनी रहती है. इस उधेडड़बुन के चक्कर में लोग दूसरे राज्य की तरफ मंह मोड़ लेते हैं. उद्यमियों का सपना कागजों तक ही सीमित रह ‘गया है. यह कहानी जियाडा में आये आवेदनों की स्थिति बयान कर रही है. यहां यूनिट एग्जिस्टेंस और ऑपरेशनल सर्टिफिकेट के लिए 176 आवेदन जियाडा के पास आए थे. इनमें से मात्र 97 को ही मंजूरी दी गई. शेष आवेदन फाइलों में अटके पड़े हैं. छोटे छोटे उद्यमियों का आरोप है कि जियाडा की जटिल प्रक्रियाएं और धीमी रफ्तार औद्योगिक विकास में सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है.
राज्य का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र आदित्यपुर भी इसप्रक्रिया से अछता नहीं है. यहां आए 895 आवेदनं में से 253 को स्वीकति मिली, 374 रिजेक्ट कर दिए गए और 268 अब भी प्रक्रियाधीन हैं. स्वीकृति मिलने के बावजूद जब जमीन ही उपलब्ध नहीं कराई गई तो निवेशको के सामने परियोजनाओं को शुरू करना मुश्किल हो गया है.




