2030 तक भारत का ‘टेक सुपरपावर’ बनने का महाप्लान तैयार

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Delhi: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुई ऐतिहासिक डील के चलते हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा होने वाला है। ‘Towards 2030’ नाम का यह एजेंडा सिर्फ एक समझौता नहीं बल्कि भारत को दुनिया का टेक हब बनाने का एक नक्शा या कहें कि ब्लूप्रिंट है। एक तरफ जहां दुनिया उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है, वहीं भारत और यूरोप ने मिलकर तरक्की, सुरक्षा और इनोवेशन का एक नया रास्ता चुना है। यह डील न सिर्फ भारत को दुनिया की टेक राजधानी बनाने में मदद करेगी बल्कि रोजगार और स्वदेशी तकनीक को वैश्विक पहचान दिलाने का बड़ा मंच भी उपलब्ध कराएगी। चलिए डिटेल में समझते हैं इस महाप्लान का सार।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह तीसरी कोशिश है, जिसमें दक्षिण एशियाई देश 15 क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता दे रहा है. इनमें हाई-एंड सेमीकंडक्टर्स, धातु और श्रम-प्रधान चमड़ा उद्योग शामिल हैं. सरकार का लक्ष्य भारत की आर्थिक वृद्धि को बढ़ाना और सालाना वस्तु निर्यात को 1.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है. मोदी सरकार पहले भी दो बार मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा जीडीपी में 25% तक बढ़ाने की कोशिश कर चुकी है. साल 2014 में ‘मेक इन इंडिया’ अभियान और साल 2020 में 23 अरब डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज के बावजूद अभी तक यह लक्ष्य हासिल नहीं हो सका.डील का फायदा सिर्फ सरकारों तक ही नहीं बल्कि आम लोगों को भी काफी प्रभावित करेगा। इस डील की वजह से आने वाले समय में भारतीय युवाओं के लिए यूरोप में काम करने, पढ़ाई करने और बिजनेस करने के रास्ते और भी आसान होंगे। बता दें कि इस महाडील में स्किल्स और मोबीलिटी पर खास ध्यान दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे भारतीय प्रोफेशनल्स अपनी प्रतिभा वैश्विक स्तर पर दिखा पाएंगे। 2026 में ब्रुसेल्स में होने वाली अगली ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) की बैठक यूरोप और भारत की दोस्ती को और मजबूत करेगी।

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