जेएनएसी क्षेत्र में अवैध निर्माण मामला: हाईकोर्ट ने एक प्रतिवादी को दी अंतरिम राहत, तोड़फोड़ पर रोक


जमशेदपुर : जमशेदपुर में जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) के अंतर्गत अवैध निर्माण और नक्शा विचलन से जुड़े चर्चित मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने एक प्रतिवादी को अंतरिम राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने प्रतिवादी संख्या 13 कहकशा नाहिद के भवन पर फिलहाल तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 9 मार्च तय की है। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी संख्या 13 की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्हें हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि अवैध निर्माण से जुड़े मामलों में शीर्ष अदालत ने कई प्रतिवादियों के लिए यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
इसी आधार पर उन्होंने अपने भवन पर हो रही तोड़फोड़ की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने प्रतिवादी संख्या 13 के निर्माण पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं करने और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।
प्रार्थी राकेश कुमार झा की ओर से अधिवक्ता निरंजन कुमार ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए 14 और 28 जनवरी 2026 को पारित हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन आदेशों में अवैध निर्माण को लेकर सख्त निर्देश दिए गए थे, जिन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जाना आवश्यक है।
यह मामला 14 जनवरी 2026 को पारित उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें तीन अधिवक्ताओं की समिति की रिपोर्ट के आधार पर जेएनएसी को अवैध भवनों को तोड़ने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद 28 जनवरी को प्रतिवादियों द्वारा दायर आवेदनों को कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
इन दोनों आदेशों को राकेश कुमार झा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इससे पहले हाईकोर्ट ने उनकी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी 24 प्रतिवादियों के अवैध निर्माण तोड़ने का आदेश दिया था। प्रतिवादियों ने इस आदेश में संशोधन और तोड़फोड़ पर रोक की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी कि अवैध निर्माण किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
हालांकि, इस मामले में पहले से कई प्रतिवादी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुके हैं और वहां कुछ को राहत भी मिली है। अब आगे का निर्णय सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।



