“माई लार्ड्स, मैं रोज़ RS325 ही कमाता हूँ” — पत्नी को Rs10,000 भत्ते पर सुप्रीम कोर्ट में पति की दलील


नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में एक तलाक और गुज़ारा भत्ता मामले की सुनवाई के दौरान एक अनोखी दलील सामने आई। कोर्ट ने पति को अपनी पत्नी को ₹10,000 प्रतिमाह गुज़ारा भत्ता देने का निर्देश दिया था, लेकिन पति ने कहा कि उसकी रोज़ाना आय केवल ₹325 है, इसी कारण वह इतना भत्ता नहीं दे सकता।सुनवाई के दौरान पति के वकील ने कोर्ट को बताया कि उसका क्लाइंट एक निजी कंपनी में काम करता है और उसकी सीमित आमदनी है। उसने कहा कि अन्य कर्मचारियों द्वारा हलफनामा देकर उसके वेतन की पुष्टि की जा सकती है।

इस दलील पर कोर्ट ने हैरानी जताई और कहा कि भत्ता निर्धारित करते समय पति की कमाई और दायित्वों को ध्यान में रखना ज़रूरी है। साथ ही न्यायालय ने सुझाव दिया कि पत्नी और पति अपने मतभेदों को बातचीत से सुलझाने की कोशिश करें।एक मज़ेदार पल भी आया जब कोर्ट ने टिप्पणी की कि पति अपनी पत्नी को साथ रखे, वह उसके और बच्चों के लिए खाना बना सकती है। पति ने बताया कि उसकी पत्नी ने उनके और उसके माता-पिता के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिससे मेल-मिलाप मुश्किल है।कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि शायद पति की कंपनी से पूछा जाए कि उसे इतनी कम सैलरी क्यों दी जा रही है। इस पर आगे के फैसले को सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा गया है।यह मामला परिवार कानून के तहत गुज़ारा भत्ता और पति की कमाई क्षमता के बीच संतुलन पर केंद्रित है। अदालत भविष्य में फैसला सुनाएगी कि निर्धारित भत्ता राशि कितनी उपयुक्त है.



