बांग्लादेश में लिंचिंग में मारे गए हिन्दू युवक के परिजनों को देंगे आर्थिक मदद,


पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में नेता विपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार (23 दिसंबर) को ऐलान किया कि पड़ोसी देश बांग्लादेश के मैमनसिंह में हाल ही में भीड़ हिंसा का शिकार हुए हिंदू युवक दीपू चंद्र दास के परिवार को आर्थिक मदद दी जाएगी। दीपू चंद्र दास एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करते थे। पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) की जांच से पता चला है कि हत्या की मुख्य वजह फैक्ट्री में कार्यस्थल विवाद था, हालांकि शुरुआत में ईशनिंदा का आरोप लगाया गया। जांच में ईशनिंदा के कोई ठोस सबूत नहीं मिले। भीड़ ने दीपू को फैक्ट्री से बाहर निकालकर पीटा, फिर ढाका-मैमनसिंह हाईवे पर पेड़ से लटकाया और आग लगा दी। इस घटना के बाद बांग्लादेश में अशांति बढ़ गई, जो छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या से जुड़ी थी। अंतरिम सरकार ने इसकी निंदा की और कहा कि ऐसी हिंसा के लिए नई बांग्लादेश में कोई जगह नहीं है। अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें फैक्ट्री के कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं।अधिकारी ने कोलकाता में बांग्लादेश डिप्टी हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन के दौरान कहा कि वे दीपू के परिवार से संपर्क में हैं और कल (बुधवार) उनसे बात कर आर्थिक मदद की व्यवस्था तय करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अल्पसंख्यकों पर हमले नहीं रुके तो 24 दिसंबर को बॉर्डर पर एक घंटे का ब्लॉकेड और 26 दिसंबर को फिर प्रदर्शन होगा। भारत में दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद समेत कई शहरों में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किए। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस से झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की।दीपू के परिवार को दुनिया भर से मदद मिल रही है। अमेरिका, सिंगापुर और अन्य देशों में रहने वाले हिंदू दान भेज रहे हैं। सोशल मीडिया पर मदद की अपील तेज है। इस घटना के बाद राजनयिक तनाव बढ़ा है। बांग्लादेश हाई कमीशन ने दिल्ली और अगरतला में वीजा सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दीं, जबकि भारत ने भी कुछ केंद्रों में सेवाएं रोकीं। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता जताई है।




