आखिरकार दिख गया जिला आपूर्ति विभाग का सनसनीखेज भ्रष्ट कारनामा …राज्य खाद्य गोदाम में लगी आग की लीपापोती क्यों? 40 दिन बीत जाने के बाद भी पदाधिकारी नहीं उठा रहे पर्दा …


सरायकेला :- ग़म्हरिया प्रखंड परिसर स्थित राज्य खाद्य गोदाम में लगी आग के मामले कि लीपापोती से जिला प्रशासन के संबद्ध पदाधिकारी संदेह के घेरे में आ गए हैं। इस घटना के करीब 40 दिन बीत जाने के बाद भी इस पर से पर्दा नहीं उठा पाना ही संदेह को जन्म दे दिया है। घटना के कई दिनों बाद गोदाम को खानापूर्ति के लिए सील तो कर दिया, किंतु इस महत्वपूर्ण मामले को ठंडे बस्ते में डालने की हर कोशिश शुरू हो गई। राज्य में आपूर्ति विभाग के लिए यह सबसे बड़ी दुखद घटना होने के बाद भी जिला आपूर्ति पदाधिकारी पुष्कर सिंह मुंडा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होना समझ से परे है। बताया गया कि डीएसओ मुंडा ही जिले के सभी खाद्यान्न गोदाम के जिला प्रबंधक हैं। उनके योगदान देने के महज चार माह में जन वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। भ्रष्टाचार की हदें पार करने का आलम यह है कि डीसी के जनता दरबार में आधे से अधिक मामले सिर्फ आपूर्ति का ही रहता है। बल्कि, लाभुकों तक अनाज पहुंचना ही बंद हो गया है। अब, जरा देखिए, अगस्त में डीएसओ के पद पर योगदान दिया, सितंबर का राशन किसी तरह लाभुकों तक पहुंचा। किंतु अक्टूबर और नवंबर माह का राशन से लाभुक वंचित रह गए। उसके बाद गोदाम में आग भी लग गई। इस घटना में जहां खाद्यान्न के जलने से हुई बर्बादी से सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ, वहीं एक सरकारी कर्मी समेत दो की हृदयविदारक मौत ने कई बड़े सवालों को जन्म दे दिया है। इस बड़े मामले पर पर्दा डालने का प्रयास भी संगीन अपराधों की ओर इंगित करता है। 28 अक्टूबर की इस घटना में एजीएम अभिषेक हाजरा एवं डीएसडी राजू सेनापति समेत दो व्यक्तियों की झुलसकर मौत होने का यह गंभीर मामला भले ही जिला प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण नहीं हो और लीपापोती कर इस मामले को समाप्त करना चाहता हो, किंतु मृतक के परिजनों से लेकर आम लोगों के लिए यह मामला आने वाले समय के लिए तूफान साबित हो सकता है। इस घटना में एक सरकारी कर्मी की मौत हुई है। आखिर इस घटना की उच्चस्तरीय जांच के लिए क्यों नहीं सरकार को लिखा गया। इतना ही नहीं, इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि गोदाम में आग लगने का कारण अगर भ्रष्टाचार है तो फिर इसकी जवाबदेही किसकी है। डीएसओ ही जिले भर के गोदामों के मालिक हैं। अगर ग़म्हरिया गोदाम में भ्रष्टाचार की बातें सामने आ रही थी तो फिर डीएसओ सह प्रबंधक ने एजीएम पर क्यों नहीं कार्रवाई की। उनके योगदान के बाद चार महीने में अगर एजीएम पर कार्रवाई कर गोदाम का प्रभार किसी अन्य को दे दिया जाता तो निश्चित तौर पर इस हादसे को रोका जा सकता था। क्या डीएसओ को यह पता नहीं था कि गोदाम में कितने की हेराफेरी है। अगर पता था तो फिर इस बात को क्यों नहीं सार्वजनिक करना चाहते है कि कितना क्विंटल अनाज जला।

अगले एपिसोड में बताएंगे इस मामले का डिटेल्स…



