36 साल पहले लगा था हत्या का आरोप, गिरफ्तारी से बचने के लिए धर्म और नाम तक बदला,

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उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बरेली से जो खबर आ रही है वो किसी बॉलीवुड फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती है. होता कुछ यूं है कि एक शख्स पर 36 साल पहले हत्या का आरोप लगता है. इस आरोप के बाद से आरोपी पुलिस से बचने के लिए यहां वहां भागता रहा. इस दौरान उसने अपना धर्म और नाम तक भी बदला. उसे लगा कि वो पुलिस की आंखों में धूल झोंक देगा लेकिन उसके सारे पैतरे धरे के धरे रह गए. पुलिस ने इस आरोपी को हत्या के मामले में 36 साल बाद गिरफ्तार कर लिया है. मामला बरेली के प्रेम नगर इलाके का है. पुलिस ने आरोपी की पहचान प्रदीप सक्सेना के रूप में की है.

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पुलिस के अनुसार प्रदीप सक्सेना ने हत्या के मामले में 1989 में जमानत मिलने के बाद कभी कोर्ट में पेश नहीं हुआ. पुलिस ने उसे ढूंढ़ने की काफी कोशिश की लेकिन वो लापता हो गया. पुलिस की जांच में अब पता चला है कि 1989 में लापता होने के बाद आरोपी ने सबसे पहले अपना धर्म बदला. उसने धर्म बदलकर अपना नाम अब्दुल कर लिया. इसके बाद उसने मुरादाबाद में जाकर बतौर ड्राइवर का काम किया. वो अपने इस प्लान काफी समय तक सफल भी रहा. लेकिन आखिरकार वो 36 साल के बाद पुलिस के हत्थे जरूर चढ़ा. 16 अक्टूबर 2025 को हाईकोर्ट ने आरोपी को चार सप्ताह के भीतर गिरफ्तार कर CJM बरेली के समक्ष पेश करने का आदेश दिया. आदेश मिलते ही एसएसपी अनुराग आर्य ने सीओ नगर प्रथम आशुतोष शिवम के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की. जांच टीम ने पहले आरोपी के पैतृक कस्बे शाही में दबिश दी, जहां पता चला कि प्रदीप लगभग 30–36 साल पहले ही घर छोड़ चुका था. इसके बाद पुलिस ने उसके भाई सुरेश बाबू से जानकारी जुटाई, जो किला थाना क्षेत्र के मोहल्ला साहूकारा में रहता है. सुरेश और उसकी पत्नी ने बताया कि प्रदीप अब मुस्लिम धर्म अपना चुका है और मुरादाबाद में रहता है. यही सुराग निर्णायक साबित हुआ.पुलिस टीम ने मुरादाबाद के मोहल्ला करूला में दबिश देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. एसपी सिटी मानुष पारिख ने बताया कि आरोपी लंबे समय से पहचान छुपाकर फरार चल रहा था, लेकिन सतत जांच और टीमवर्क के चलते आखिरकार उसे पकड़ लिया गया. फरार आरोपी को अब जल्द ही अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा, जहां 36 साल पुराना मामला फिर से खुलकर सामने आएगा. दशकों बाद सामने आई यह गिरफ्तारी इस बात का उदाहरण है कि कानून से बचना आसान नहीं, चाहे कितने ही साल क्यों न बीत जाएं.

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