एस-500 पर नजर, Su-57 पर चर्चा की खबर, जानें रक्षा क्षेत्र में रूस से क्या चाहती है सरकार


दिल्ली : रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का आज भारत दौरे का दूसरा दिन है। इसी के साथ दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को एक नई गति मिलने की संभावना है। व्यापार और सामरिक-कूटनीतिक समझौतों के साथ-साथ दोनों देशों की निगाह एक बार फिर रक्षा समझौतों पर होगी। दरअसल, भारत के रिश्ते रूस से उस समय से स्थापित हैं, जब सोवियत संघ का विघटन तक नहीं हुआ था। भारत उस दौर से ही अपनी रक्षा खरीद के लिए रूस पर निर्भर था। बीते कुछ वर्षों में भारत ने अपनी रक्षा जरूरतों के लिए फ्रांस, इस्राइल और अमेरिका का रुख जरूर किया है, लेकिन अब भी भारत की ज्यादातर रक्षा आपूर्ति रूस से ही होती है। रूस पर भारत की इस निर्भरता का कारण 20वीं और 21वीं सदी की शुरुआत में रूस से खरीदे गए हथियार रहे हैं। इस समय में लड़ाकू विमानों से लेकर बंदूकों और नौसैनिक पोतों से लेकर मिसाइलों तक के मामले में रूस भारत का सबसे बड़ा साझेदार रहा। इसके बाद एस-400 डिफेंस सिस्टम और एके-203 असॉल्ट राइफल के समझौते ने भी दोनों देशों के सहयोग को बढ़ाया है। यानी कुल मिलाकर भारत और रूस रक्षा के मामले में बंधे हैं।दोनों देश ने अपने रक्षा संबंधों को बढ़ाने के लिए 2021 से 2031 की अवधि के लिए सैन्य तकनीकी सहयोग कार्यक्रम से जुड़े समझौते को भी बढ़ाया है। भारत और रूस के बीच रक्षा व सैन्य तकनीकी मामलों की समीक्षा हेतु एक संस्थागत व्यवस्था मौजूद है। 2021 में शुरू हुआ 2+2 इससे जुड़ा एक उच्चस्तरीय मंच है, जहां दोनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्री संयुक्त रूप से अपने संबंधों की समीक्षा करते हैं। इससे जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण निकाय भारत-रूस अंतर-सरकारी सैन्य तकनीकी सहयोग आयोग (IRIGC-MTC) है, जिसकी स्थापना 2000 में हुई। दोनों देशों के बीच फिलहाल टी-90 टैंकों और सुखोई-30एमकेआई विमानों का लाइसेंस उत्पादन, कामोव हेलीकॉप्टर (Ka-31) की आपूर्ति शामिल है। यह सहयोग अब पारंपरिक खरीदार-विक्रेता रिश्तों से आगे बढ़कर संयुक्त तौर पर डिजाइनिंग, अनुसंधान और उत्पादन मॉडल पर विकसित हो चुका है।भारत बीते कई वर्षों से रूस के एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस प्रणाली ने पाकिस्तान के सभी हमलों को न सिर्फ नाकाम किया, बल्कि उसे बड़ा नुकसान भी पहुंचाया। दूसरी तरफ भारत की नजर इस बार पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 पर भी रहेगी, जो कि न सिर्फ अमेरिका के एफ-35 लड़ाकू विमान के मुकाबले में है बल्कि चीन के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स का भी जवाब हो सकता है। भारत पहले ही रूस से एस-400 डिफेंस सिस्टम खरीद चुका है। हालांकि, अब तक देश के पास सीमित एस-400 सिस्टम हैं और वह कम से कम पांच रेजिमेंट एस-400 और खरीदने की तैयारी में है, जिसे भारतीय सेना पाकिस्तान और चीन से लगती सीमा के करीब अपने रक्षा ढांचों की सुरक्षा के लिए तैनात कर सकती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों में भी एस-400 का सुरक्षा ढांचा मुहैया कराया जा सकता है। भारत न सिर्फ एस-400 की रेजिमेंट बढ़ाना चाहता है, बल्कि इस डिफेंस सिस्टम के आधुनिक प्रारूप एस-500 प्रोमिथियस को खरीदने पर विचार कर रहा है। एस-500 सीधे तौर पर एस-400 का एडवांस्ड वर्जन है। इसकी रेंज 600 किलोमीटर तक की है और यह आसमान में 200 किलोमीटर ऊपर जाकर दुश्मन को तबाह कर सकता है। यानी दुनिया में मौजूद किसी भी रक्षा प्रणाली के मुकाबले एस-500 सबसे उन्नत है। रूस ने भारत को सुखोई-57 लड़ाकू विमान की पेशकश की है। इस पेशकश में भारत में पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 स्टील्थ लड़ाकू विमान के उत्पादन का प्रस्ताव दिया गया है। साथ ही रूस विमान के प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए भी तैयार है। रूस की ओर से यह प्रस्ताव राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से पहले आया है। माना जा रहा है कि भारत और रूस के बीच बड़ा रक्षा सौदा हो सकता है। रूस का उन्नत सुखोई-57 डॉगफाइट क्षमताओं, मजबूत संरचना और कम रखरखाव लागत के मामले में अमेरिकी एफ-35 से काफी आगे है। सुखोई की रेंज की बात करें तो यह उच्च हिमालयी क्षेत्रों से लेकर रेगिस्तानी इलाकों तक इसकी ऑपरेशनल क्षमता बेहद ही शानदार है।
सामरिक विशेषज्ञ बताते हैं कि यह दुनिया का सबसे घातक, सबसे खतरनाक, तेज गति से हमला करने में सक्षम फाइटर जेट हो सकता है। अभी तक एफ-35 लाइटनिंग ही ऐसा फाइटरजेट है, जिसके मिशन की टोह लेना बहुत मुश्किल है, लेकिन कहा जा रहा है कि घातकता के मामले में यह उसे कड़ी टक्कर दे सकता है।




